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ट्रंप ने फिर की मध्यस्थता करने की पेशकश; कहा भारत,पाकिस्तान पर निर्भर

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर कश्मीर को लेकर मध्यस्ता करने की पेशकश की है. ट्रंप ने कहा कि यदि पीएम मोदी चाहे तो वह कश्मीर पर मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को कहा कि कश्मीर विवाद को सुलझाना भारत और पाकिस्तान पर निर्भर करता है लेकिन अगर दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसी देश इस दशकों पुराने मुद्दे को सुलझाने में उनकी मदद चाहेंगे तो वह इसके लिए तैयार हैं.

ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दो ‘शानदार’ लोग हैं जिन्हें ‘अच्छी तरह से’ मिलना चाहिए.

ट्रंप ने कहा, “ मेरे विचार में वे बेहतरीन लोग हैं – मेरा मतलब खान और मोदी से है. मुझे लगता है कि दोनों के बीच इस पर अच्छे से बातचीत हो सकती है लेकिन अगर वे चाहते हैं कि उनकी मदद के लिए कोई हस्तक्षेप करे….और मैंने पाकिस्तान से भी इस बारे में बात की और भारत से भी.” उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि कश्मीर मुद्दा लंबे समय से चल रहा है. ट्रंप से उन्होंने जब पूछा कि “वह कैसे कश्मीर मुद्दा सुलझाना चाहते हैं” तो उन्होंने कहा, “अगर वे चाहेंगे तो, मैं निश्चित तौर पर हस्तक्षेप करुंगा.”

कश्मीर पर मध्यस्थता की उनकी पेशकश को भारत की ओर से खारिज किए जाने पर पूछे गए एक सवाल पर ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, “यह (मध्यस्थता की पेशकश स्वीकार करना) पूरी तरह प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) पर निर्भर करता है.” ट्रंप से जब भारत द्वारा मध्यस्थता की पेशकश खारिज किए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस संबंध में जानने के लहजे में सवाल किया, “उन्होंने पेशकश स्वीकार की या नहीं?”

पिछले महीने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के अमेरिकी दौरे के दौरान ट्रंप और खान की मुलाकात हुई थी, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि पीएम मोदी ने उनसे कश्मीर पर मध्यस्थता करने को कहा था. ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मसले पर मध्यस्थता करने की पेशकश करते हुए कहा था कि यदि दोनों देश उनसे मध्यस्थता के लिए कहते हैं तो उन्हें खुशी होगी.

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भारत ने इस पेशकश को खारिज कर दिया था जबकि पाकिस्तान ने ट्रंप के बयान का स्वागत किया था.

ट्रंप द्वारा कश्मीर पर दिए गए बयान को भारत ने खारिज करते हुए कहा था कि पीएम मोदी और ट्रंप के बीच हुई मुलाकात में इस तरह की कोई बातचीत नहीं हुई थी.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद में यह साफ़ करते हुए कहा था,”कश्मीर को लेकर भारत का स्टैंड साफ है और सरकार की सोच में बिल्कुल भी बदलाव नहीं आया है. हमारी सोच है कि भारत और पाकिस्तान के बीच विवादित मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय बातचीत के जरिए होना संभव है. इसमें तीसरे पक्ष की भूमिका का सवाल ही पैदा नहीं होता है.’