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अर्नब गोस्वामी केस में सुप्रीम कोर्ट से महाराष्ट्र सरकार को झटका, अर्नब की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

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रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्नब गोस्वामी से जुड़े मामले में आज महाराष्ट्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा। सर्वोच्च अदालत ने विशेषाधिकार हनन मामले (Breach of privilege motion) में अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा सचिव को अवमानना का नोटिस भी जारी किया है। SC ने आज पूछा कि महाराष्ट्र विधानसभा सचिव के खिलाफ महाराष्ट्र विधानसभा सचिव के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​का कारण बताओ नोटिस क्यों नहीं जारी किया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता अर्नब गोस्वामी को उनके मामले के खिलाफ जारी विशेषाधिकार नोटिस में सुनवाई तक गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा सचिव ने महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की आलोचना के लिए अर्नब के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस जारी किया था।

इस तरह के आचरण की सराहना नहीं करते – SC

इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि कोई इस तरह से कैसे डरा सकता है। इस तरह से धमकियां देकर किसी को अदालत में आने से कैसे रोका जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम इस तरह के आचरण की सराहना नहीं करते हैं।

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इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा के सचिव को दो सप्ताह बाद इस केस की अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में हाजिर रहने को कहा है। अब इस केस की सुनवाई अब कल सुबह 11 बजे की जाएगी।

क्या था पूरा मामला।

सबसे पहले बता दे अर्नब गोस्वामी को मुंबई के नजदीक रायगढ़ जिले से बुधवार 4 नवंबर की सुबह करीब आठ बजे गिरफ्तार किया गया था। दरअसल ये कार्रवाई करीब दो साल पुराने एक मामले में हुई थी जिसमे 2018 में अलीबाग में वास्‍तुविद अन्‍वय नाईक ने अपने बंगले में आत्‍महत्‍या कर ली थी। उनके साथ उनकी मां ने भी खुदकुशी की थी। मां कुमुद का शव भी कमरे के सोफे पर मिला था। इसके बाद सुसाइड नोट में तीन कंपनियों पर पैसे का भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया था। इसमें से एक अर्नब की रिपब्‍लिक कंपनी भी थी। अर्नब पर आरोप है कि ऑफिस का काम करवाने के बाद उनके 83 लाख रुपए नहीं दिए।

केस बंद होने के बाद फिरसे खुली थी फाइल।

उस समय पुलिस ने खुदकुशी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी लेकिन बाद में केस बंद कर दिया गया। राज्य में सरकार बदलने के बाद पीड़ित परिवार ने एकबार फिर से मुद्दा उठाया और न्याय की गुहार लगाई। मई महीने में गृहमंत्री अनिल देशमुख ने जांच CID को सौंप दी। जिसे बाद बीते 4 नवंबर पुलिस अर्नब गोस्वामी के घर पहुंची और उन्हें हिरासत में लिया।

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