अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों में समझौते पर सहमति, स्विट्जरलैंड वार्ता में कई अहम फैसले

अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक रोडमैप पर सहमति जताई है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच यह सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक प्रगति मानी जा रही है।
स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी, जिनमें एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति का गठन, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव रोकने के लिए सीधा संचार तंत्र और भविष्य के समझौतों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक ढांचा शामिल है।
शुरुआती विवाद के बाद फिर शुरू हुई बातचीत
वार्ता की शुरुआत तनावपूर्ण रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कुछ सार्वजनिक टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कुछ समय के लिए बातचीत छोड़ दी थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने क्षेत्रीय तनाव जारी रहने पर कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद ईरानी पक्ष ने बयान को आपत्तिजनक बताते हुए वार्ता को अस्थायी रूप से रोक दिया।
हालांकि, कतर की मध्यस्थता के बाद ईरानी प्रतिनिधि वापस वार्ता में शामिल हुए और बातचीत देर रात तक जारी रही।
उच्चस्तरीय समिति करेगी निगरानी
कतर और पाकिस्तान द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि वार्ता सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई।
दोनों देशों ने एक हाई लेवल कमेटी बनाने पर सहमति जताई है, जो पूरे वार्ता प्रक्रिया की राजनीतिक निगरानी करेगी। यह समिति परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों में राहत और विवाद समाधान से जुड़े कार्य समूहों की देखरेख करेगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए बनेगा संचार तंत्र
वार्ता का एक अहम परिणाम होर्मुज जलडमरूमध्य के लिए प्रत्यक्ष संचार प्रणाली स्थापित करने का निर्णय रहा।
इस तंत्र का उद्देश्य समुद्री मार्गों पर गलतफहमियों को रोकना और व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
लेबनान के लिए डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल
अमेरिका, ईरान और लेबनान के बीच एक विशेष डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल बनाने का भी फैसला लिया गया है।
यह तंत्र लेबनान में सैन्य गतिविधियों से जुड़े समझौतों के पालन की निगरानी करेगा और भविष्य में किसी भी संभावित टकराव को रोकने में मदद करेगा।
ईरान ने जताई संतुष्टि
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वार्ता में हुई प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थ देशों के प्रयासों से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे बढ़ने का रास्ता खुला है।
अराघची ने तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात, कुछ प्रतिबंधों में राहत, जमे हुए वित्तीय संसाधनों की रिहाई और विकास परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर हुई प्रगति का भी उल्लेख किया।
आगे क्या?
दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया है। तकनीकी स्तर की वार्ताएं पूरे सप्ताह जारी रहेंगी और इन्हीं चर्चाओं के आधार पर अंतिम समझौते का मसौदा तैयार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम करने और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लाने में मदद मिल सकती है।





