सुप्रीम कोर्ट में NIA Act 2008 की वैधता को चुनौती: केंद्र सरकार से माँगा जवाब

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम, 2008 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले में केंद्र सरकार और एनआईए को नोटिस जारी कर उनका पक्ष जानने की मांग की है।
याचिका का मुख्य आधार
यह याचिका एनआईए अधिनियम के अस्तित्व और उसकी शक्तियों पर गंभीर सवाल उठाती है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) का उल्लंघन करता है। इसके साथ ही, याचिका में यह भी कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा इस कानून को पारित करना उसकी विधायी क्षमता (Legislative Competence) से परे है।
भारतीय संविधान के तहत ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि NIA एक्ट केंद्र को उन शक्तियों का उपयोग करने की अनुमति देता है जो अनिवार्य रूप से राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, जिससे संघीय ढांचे (Federal Structure) पर असर पड़ता है।
आगे की राह
यह पहली बार नहीं है जब एनआईए की शक्तियों पर सवाल उठे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जारी करना इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर ले आया है। यदि न्यायालय इस अधिनियम के प्रावधानों को असंवैधानिक पाता है, तो यह देश की आंतरिक सुरक्षा और जांच प्रक्रियाओं को व्यापक रूप से प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें केंद्र सरकार के जवाब पर टिकी हैं।





