महिला आरक्षण के साथ Delimitation पर क्यों भड़की बहस? थरूर बोले ‘जल्दबाजी न करें’

संसद में इन दिनों महिलाओं के आरक्षण और delimitation को लेकर बहस तेज हो गई है। इस बीच कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने सरकार के प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन इसे delimitation जैसी जटिल प्रक्रिया से जोड़ना सही नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, delimitation का मतलब है लोकसभा और विधानसभा सीटों का दोबारा निर्धारण, जो आमतौर पर जनसंख्या के आधार पर किया जाता है। Tharoor का कहना है कि यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील है और इसे जल्दबाजी में लागू करने से राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है।
‘Political Demonetisation’ क्यों कहा?
अपने बयान में उन्होंने delimitation की तुलना 2016 Indian demonetisation से करते हुए इसे “political demonetisation” बताया। उनका इशारा इस बात की ओर था कि जैसे नोटबंदी का फैसला अचानक लिया गया था और उसके बड़े असर देखने को मिले, वैसे ही अगर delimitation बिना पर्याप्त चर्चा के लागू हुआ, तो इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
राज्यों के बीच असंतुलन की चिंता
उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण भारत के कई राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता हासिल की है, जबकि कुछ अन्य राज्यों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में अगर सीटों का बंटवारा केवल जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो यह उन राज्यों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के लक्ष्य को हासिल किया है।
क्या है Tharoor का सुझाव?
Tharoor ने सरकार से अपील की कि महिलाओं के आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए, क्योंकि यह एक जरूरी और लंबे समय से लंबित सुधार है। लेकिन delimitation जैसे बड़े और जटिल मुद्दे पर अलग से विस्तार से चर्चा की जानी चाहिए, ताकि सभी राज्यों के हितों का संतुलन बना रहे।
कुल मिलाकर, यह विवाद इस बात को लेकर है कि महिलाओं के आरक्षण जैसे अहम कदम को क्या delimitation के साथ जोड़ा जाना चाहिए या फिर दोनों मुद्दों को अलग-अलग तरीके से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।






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