
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 8-10 जुलाई, 2026 तक की ऑस्ट्रेलिया यात्रा बेहद सफल रही है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, शिक्षा, खनन और अनुसंधान जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 18 बड़े समझौतों को अंतिम रूप दिया है।
रक्षा और सुरक्षा में ऐतिहासिक सहयोग
विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इस दौरे में ‘रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा’ को अपनाया गया है। इसके तहत दोनों देश रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाएंगे, नवाचार को बढ़ावा देंगे और आपदा राहत (HADR) में एक-दूसरे की मदद करेंगे। साथ ही, भारतीय तटरक्षक बल और ऑस्ट्रेलिया के मैरीटाइम बॉर्डर कमांड के बीच भी एक समझौता हुआ है, जो समुद्री सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करेगा।
ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग
दोनों देशों ने ‘ऊर्जा सुरक्षा’ पर एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसके अलावा, नागरिक परमाणु समझौते के तहत एक प्रशासनिक व्यवस्था को मंजूरी दी गई है, जिससे भारत को ऑस्ट्रेलियाई यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को विविधता देने में मदद मिलेगी।
शिक्षा और कौशल विकास पर जोर शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े फैसले लिए गए हैं
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भुवनेश्वर के राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) में ‘खनन और खनन उपकरण’ के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा।
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फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी बेंगलुरु में और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी गुरुग्राम में अपना कैंपस स्थापित करेंगी।
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गांधीनगर में ‘रूफटॉप सोलर ट्रेनिंग एकेडमी’ को शुरू किया गया है, जहाँ 2,000 महिलाओं और युवाओं को सोलर तकनीशियन के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
सांस्कृतिक विरासत की वापसी इस यात्रा की एक और खास उपलब्धि भारत की प्राचीन धरोहरों की वापसी रही। ऑस्ट्रेलिया ने भारत को तीन प्राचीन वस्तुएं सौंपी हैं, जिनमें नंदी की मूर्ति, भद्रकाली के साथ कांस्य त्रिशूल और स्कंद (कार्तिकेय) की 12वीं सदी की मूर्ति शामिल है।





