मध्य प्रदेश में फर्जी डॉक्टरों का बड़ा खुलासा, 10 लाख रुपये में खरीदी MBBS डिग्री; हजारों मरीजों की जान से हुआ खिलवाड़

Bhopal: मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। राज्य के कई जिलों में ऐसे कथित डॉक्टर पकड़े गए हैं, जिन्होंने फर्जी MBBS डिग्री और नकली मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन के आधार पर सरकारी अस्पतालों और संजीवनी क्लीनिकों में नौकरी हासिल कर ली। जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ आरोपियों ने 8 से 10 लाख रुपये देकर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे।
इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अब पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और संजीवनी क्लीनिकों में नियुक्त 2,000 से अधिक संविदा डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी गई है।
दमोह से हुआ फर्जी डॉक्टर रैकेट का खुलासा
इस पूरे मामले का खुलासा सबसे पहले दमोह जिले में हुआ, जहां संजीवनी क्लीनिक में तैनात तीन डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान डॉ. कुमार सचिन यादव, डॉ. राजपाल गौर और डॉ. अजय मौर्य के रूप में हुई है।
जांच में पता चला कि इनमें से कुछ आरोपियों ने असली डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन नंबरों का इस्तेमाल कर नकली दस्तावेज तैयार किए थे। एक आरोपी पर 2018 के रजिस्ट्रेशन नंबर में छेड़छाड़ कर उसे 2023 का दिखाने का आरोप है।
रोज 30 से 40 मरीजों का कर रहे थे इलाज
चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी पिछले दो साल से अधिक समय से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर बनकर काम कर रहे थे। वे प्रतिदिन 30 से 40 मरीजों का इलाज कर रहे थे और सरकारी वेतन के रूप में 70 से 80 हजार रुपये प्रति माह प्राप्त कर रहे थे।
हालांकि संजीवनी क्लीनिकों में गंभीर मरीजों का इलाज नहीं होता, लेकिन हजारों लोगों की जांच, दवाइयों की सलाह और स्वास्थ्य सेवाएं ऐसे लोगों द्वारा दी गईं जिनकी चिकित्सकीय योग्यता अब सवालों के घेरे में है।
भोपाल तक पहुंची जांच, 9 और डॉक्टरों पर FIR
मामले की जांच अब राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। चुनाभट्टी थाना पुलिस ने नौ कथित डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को इन डॉक्टरों के दस्तावेजों को लेकर शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद जांच शुरू की गई।
दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान पता चला कि कई रजिस्ट्रेशन नंबर असली डॉक्टरों के थे, जबकि उनके नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर नौकरी हासिल की गई थी।
बड़े नेटवर्क की आशंका
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को शक है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा है, जो मोटी रकम लेकर फर्जी MBBS डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन तैयार करता है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि दस्तावेजों की जांच में किसी भी डॉक्टर के प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं, तो उसकी सेवा तत्काल समाप्त कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे मामले ने मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियुक्ति के समय मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन का ऑनलाइन सत्यापन किया जाता, तो इस तरह का फर्जीवाड़ा पहले ही पकड़ा जा सकता था।
फिलहाल पुलिस, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और अन्य एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है।





