मनी लॉन्ड्रिंग केस: चार्टर्ड अकाउंटेंट को राहत नहीं, 10 दिन में सरेंडर का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 640 करोड़ रुपये के साइबर ठगी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी भास्कर यादव को 10 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
इससे पहले 2 फरवरी को दिल्ली हाई कोर्ट ने भास्कर यादव और अशोक कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग के एक जटिल नेटवर्क से जुड़ा है और जांच एजेंसी को आरोपियों से हिरासत में पूछताछ करना जरूरी है।
अदालत ने कहा कि आरोपी पेशेवर लोग हैं और उन्होंने कथित तौर पर अपराध से कमाए गए पैसों को कई स्तरों के जरिए इधर-उधर किया। पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए कस्टडी में पूछताछ जरूरी है।
हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि यह सिर्फ क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन का मामला नहीं है। कोर्ट के मुताबिक यहां आम निवेशकों, खासकर मध्यम वर्ग के लोगों से धोखाधड़ी कर पैसे निकाले जाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आरोपी को तय समय के भीतर जांच एजेंसियों के सामने पेश होना होगा।





