दिल्ली प्रदूषण पर किरण बेदी का हमला: बंद कमरों से नहीं, धुएं में उतरकर चले गवर्नेंस

पूर्व आईपीएस अधिकारी और दिल्ली की पूर्व सीएम उम्मीदवार किरण बेदी ने राजधानी की प्रदूषण स्थिति पर सरकारों की कार्यशैली को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली का बिगड़ता हवा का स्तर एक “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी” बन चुका है और अधिकारियों को एयर-कंडीशन कमरों से निकलकर सड़क पर उतरकर हालात देखने चाहिए। शनिवार को X (पूर्व ट्विटर) पर बेदी ने लिखा, “गवर्नेंस रिमोट कंट्रोल से नहीं चलती… इसे मैदान में खड़े होकर, वही हवा सांस में लेकर, तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
प्रधानमंत्री से दखल की अपील
किरण बेदी ने एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपील की थी कि वे खुद इस मुद्दे में हस्तक्षेप करें। उन्होंने याद दिलाया कि पुदुचेरी में उपराज्यपाल रहते हुए पीएम मोदी कैसे ज़ूम मीटिंग्स में समयबद्ध तरीके से अधिकारियों से काम करवाते थे।
उन्होंने लिखा, “सर, एक बार फिर हाथ जोड़कर विनती कर रही हूं। मैंने पुदुचेरी में देखा है कि आपने कैसे सख्ती और प्रेरणा के साथ राष्ट्रीय चुनौतियों में सभी को समय पर काम पूरा करवाया।” किरण बेदी का कहना है कि पीएम की सक्रियता से जनता को भरोसा मिलेगा।
हर दिन फील्ड में उतरें अधिकारी
बेदी ने प्रदूषण को “सिस्टम की दशकों पुरानी नाकामी” बताया और कहा कि अब बहाने नहीं, मिलकर समाधान खोजने का समय है। उन्होंने कहा, “सबसे बेहतर संवेदनशीलता तब आएगी जब अधिकारी रोज़ फील्ड में उतरें, ऑफिस से बाहर निकलें और वही हवा सांस में लें। कार से नहीं, पैदल चलें। हर पैदल दौरा कार्रवाई करवाएगा।”
दिल्ली की हवा फिर ‘बहुत खराब’
शनिवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 316 दर्ज हुआ, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। पूर्वानुमान के अनुसार अभी राहत की संभावना नहीं है। नवंबर में लगभग हर दिन AQI ‘बहुत खराब’ रहा है, जबकि तीन दिनों में हवा ‘गंभीर’ स्तर (400 से ऊपर) पर पहुंच गई।
इस बीच, आयोग (CAQM) द्वारा GRAP स्टेज-3 हटाने पर भी सवाल उठे, जबकि 24 घंटे का औसत AQI गुरुवार को 377 रहा।
बेदी का सुझाव: “फील्ड लीडरशिप जरूरी”
किरण बेदी ने कहा कि सबसे ज्यादा जरूरत नेताओं और अधिकारियों की जमीन पर मौजूदगी की है उन्होंने सुझाव दिया कि दिल्ली-NCR में प्रशासनिक मॉडल को पूरी तरह बदलने की जरूरत है — ज़मीनी हालात देखकर, महसूस करके कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की। उन्होंने हाल ही में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डी.वाई. चंद्रचूड़ की टिप्पणी भी याद दिलाई, जब उन्होंने पूछा था कि “न्यायालय कोई जादू की छड़ी नहीं घुमा सकता।”
किरण बेदी का ‘जिम्मेदारी ब्लूप्रिंट’
बेदी ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक विस्तृत प्लान भी साझा किया:
पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC): राष्ट्रीय मानकों और फ्यूल रूल्स का पालन करवाए
CAQM: NCR में सभी जगह एक जैसी निर्देश लागू करवाए
PMO: सभी प्रमुख मंत्रालयों को एक दिशा में लाए
राज्य सरकारें/मुख्य सचिव/DGP: सख्त मॉनिटरिंग और कानून का पालन सुनिश्चित करें
DMs: रोज़ाना फील्ड में जाकर कार्रवाई की निगरानी करें
नगर निगम, पुलिस, प्रदूषण बोर्ड: कचरा, धूल, ट्रैफिक और इंडस्ट्रियल नियमों पर कड़ा नियंत्रण रखें
बेदी ने कहा कि अगर हर एजेंसी अपना काम ईमानदारी से, लगातार और मैदान में उतरकर करे, तो प्रदूषण पर प्रभावी काबू पाया जा सकता है।





