
Washington: अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला Jill Biden ने खुलासा किया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा उपहार में दिए गए एक खास हीरे को खरीदने पर गंभीरता से विचार किया था। हालांकि, जब अमेरिकी अधिकारियों ने उस हीरे की कीमत शुरुआती अनुमान से आठ गुना अधिक आंकी, तो उन्होंने अपना फैसला बदल दिया।
जिल बाइडेन ने अपनी हाल ही में प्रकाशित संस्मरण View from the East Wing: A Memoir में इस दिलचस्प घटना का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि जून 2023 में प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान उन्हें 7.5 कैरेट का लैब-ग्रोन (कृत्रिम रूप से विकसित) हीरा उपहार में दिया गया था।
PM Modi ने क्यों दिया था यह खास हीरा?
जिल बाइडेन के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने यह हीरा भारत की तेजी से बढ़ती सिंथेटिक डायमंड इंडस्ट्री का प्रतीक बताते हुए उन्हें भेंट किया था। उन्होंने बताया कि मोदी ने उस समय कहा था कि यह हीरा उनके गृह राज्य में तैयार किया गया है और इसकी कीमत लगभग 2,500 डॉलर है। यहां तक कि उन्होंने इसकी खरीद का बिल भी दिखाया था।
जिल बाइडेन ने लिखा, “मुझे लगा कि शायद मैं इसे खरीद लूं। लेकिन बाद में अमेरिकी विदेश विभाग ने इसकी कीमत 20,000 डॉलर आंकी, जिसके बाद मैंने इसे खरीदने का विचार छोड़ दिया।”
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हीरा बेहद खूबसूरत था और पहली नजर में उन्हें काफी पसंद आया था।
अमेरिकी नियमों के तहत सरकार की संपत्ति बन जाते हैं ऐसे उपहार
अमेरिका में नैतिकता संबंधी नियमों के अनुसार, राष्ट्रपति और प्रथम महिला को आधिकारिक यात्राओं या राजनयिक कार्यक्रमों के दौरान मिलने वाले महंगे उपहार व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होते। ऐसे सभी उपहार संघीय सरकार की संपत्ति माने जाते हैं।
हालांकि, यदि कोई अधिकारी या प्रथम महिला किसी उपहार को अपने पास रखना चाहें, तो उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित बाजार मूल्य का भुगतान करना पड़ता है।
आधिकारिक कार्यक्रमों में पहनी थी हीरे की अंगूठी
जिल बाइडेन ने बताया कि उन्होंने उस हीरे को एक अंगूठी में जड़वाया था और प्रथम महिला रहते हुए कई आधिकारिक अवसरों पर उसे पहना भी था। लेकिन पद छोड़ने के बाद उन्हें वह अंगूठी वापस सरकारी भंडार में जमा करानी पड़ी।
उन्होंने लिखा, “जब हम व्हाइट हाउस से विदा हुए, तो मैंने वह अंगूठी लौटा दी। वह अन्य हजारों राष्ट्रपतिीय उपहारों के साथ सरकारी गोदाम में चली गई।”
भारत में भी हैं ऐसे ही नियम
भारत में भी मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों को मिलने वाले विदेशी उपहारों के लिए नियम निर्धारित हैं। ऐसे उपहार विदेश मंत्रालय के अंतर्गत संचालित ‘तोशाखाना’ में जमा किए जाते हैं। यदि किसी उपहार का मूल्य निर्धारित सीमा से अधिक होता है, तो उसे अपने पास रखने के लिए संबंधित व्यक्ति को तय राशि का भुगतान करना पड़ता है।
व्हाइट हाउस डिनर की भी साझा की यादें
जिल बाइडेन ने अपनी किताब में प्रधानमंत्री मोदी की 2023 की राजकीय यात्रा के दौरान आयोजित व्हाइट हाउस स्टेट डिनर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल और मेहमानों की खान-पान संबंधी प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए पूरी तरह प्लांट-बेस्ड मेन्यू तैयार किया गया था।
उन्होंने कहा कि कई मेहमानों ने अंतिम समय में वीगन, डेयरी-फ्री और गार्लिक-फ्री भोजन की मांग की थी, जिससे व्हाइट हाउस की रसोई टीम को काफी बदलाव करने पड़े।
भारत-अमेरिका संबंधों की एक अनोखी झलक
जिल बाइडेन का यह खुलासा केवल एक उपहार की कहानी नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते कूटनीतिक संबंधों की भी एक दिलचस्प झलक पेश करता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिया गया यह हीरा आज भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक माना जा रहा है।





