केदारनाथ में हेली एम्बुलेंस की इमरजेंसी लैंडिंग, बड़ा हादसा टला

उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में शनिवार को एक और हेलीकॉप्टर हादसा टल गया, जब ऋषिकेश एम्स से मरीज को लेने आई एक एयर एंबुलेंस हेलीपैड से महज 20 मीटर पहले अचानक अनियंत्रित होकर क्रैश हो गई। यह हेलीकॉप्टर संजीवनी हेली सेवा के तहत मरीज को रेस्क्यू करने के लिए केदारनाथ पहुंचा था। क्रैश के वक्त हेलीकॉप्टर में दो डॉक्टर और एक पायलट सवार थे, जो पूरी तरह सुरक्षित हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, लैंडिंग के दौरान हेलीकॉप्टर का संतुलन अचानक बिगड़ गया और उसका पिछला हिस्सा टूट गया, जिससे क्रैश लैंडिंग करनी पड़ी। गनीमत रही कि पायलट ने समय रहते सूझबूझ दिखाई और हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतार लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
बताया गया कि यह हेलीकॉप्टर ऋषिकेश एम्स की मेडिकल टीम के साथ केदारनाथ में मौजूद एक मरीज को लेने के लिए भेजा गया था। इमरजेंसी मेडिकल सेवा के तहत यह हेली एंबुलेंस सक्रिय रूप से कार्यरत थी। हादसे के बाद हेलीकॉप्टर की तकनीकी जांच की गई, जिसमें पिछला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त पाया गया।
केदारनाथ और आसपास के इलाकों में मई महीने के भीतर यह तीसरी बड़ी हेलीकॉप्टर से जुड़ी दुर्घटना है। इससे पहले उत्तरकाशी में हुए एक हेलीकॉप्टर क्रैश में 6 तीर्थ यात्रियों की मौत हो चुकी है। वहीं, बदरीनाथ धाम में भी एक हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। कुछ दिन पहले चमोली जिले के बदरीनाथ से लौट रहे एक हेलीकॉप्टर को खराब मौसम के चलते ऊखीमठ में लैंड कराना पड़ा था।
हर साल लाखों श्रद्धालु केदारनाथ, बदरीनाथ जैसे उच्च हिमालयी तीर्थों की यात्रा करते हैं और बड़ी संख्या में हेली सेवाओं का सहारा लेते हैं। लेकिन लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने इन सेवाओं की सुरक्षा और मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शनिवार को केदारनाथ में हुआ हादसा एक और चेतावनी है कि हेली सेवाओं की नियमित निगरानी और सख्त सुरक्षा मानकों की तत्काल आवश्यकता है। श्रद्धालुओं और मेडिकल टीम की जान जोखिम में डालने वाले इन हादसों पर अब सरकार और प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे।





