डॉ. जयशंकर कल श्रीलंका दौरे पर, प्रधानमंत्री के विशेष दूत के रूप में करेंगे मुलाकात

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर मंगलवार (23 दिसंबर, 2025) को प्रधानमंत्री के विशेष दूत के रूप में श्रीलंका के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान वह श्रीलंका के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इसकी जानकारी सोमवार (22 दिसंबर, 2025) को कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने दी।
भारतीय उच्चायोग के अनुसार, यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति को दर्शाती है और चक्रवात दित्वाह से हुई भारी तबाही के बाद शुरू किए गए ऑपरेशन सागर बंधु की पृष्ठभूमि में हो रही है। चक्रवात के बाद श्रीलंका द्वारा अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील किए जाने पर भारत सबसे पहले सहायता के लिए आगे आया।
28 नवंबर को ऑपरेशन सागर बंधु की शुरुआत के बाद से भारत ने श्रीलंका को 1,134 टन से अधिक मानवीय सहायता उपलब्ध कराई है। इसमें सूखा राशन, टेंट, तिरपाल, स्वच्छता किट, कपड़े, जल शुद्धिकरण प्रणाली और 14.5 टन दवाइयाँ व सर्जिकल उपकरण शामिल हैं।
राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस विक्रांत, आईएनएस उदयगिरी, आईएनएस सुकन्या, एलसीयू-54, एलसीयू-57, एलसीयू-51 और आईएनएस घरियाल, साथ ही भारतीय तटरक्षक जहाज शौर्य ने कोलंबो और त्रिंकोमाली में बड़ी मात्रा में सहायता पहुंचाई।
आपदा के तुरंत बाद राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की दो टीमों ने खोज और बचाव कार्य किया। वहीं, भारतीय सेना के 85 सदस्यीय फील्ड अस्पताल ने महियंगनाया में शिविर लगाकर 7,000 से अधिक मरीजों को जीवनरक्षक चिकित्सा सेवाएं दीं।
इसके अलावा, गंभीर रूप से प्रभावित इलाकों में BHISHM आरोग्य मैत्री क्यूब्स के जरिए चिकित्सा केंद्र स्थापित किए गए। महत्वपूर्ण संपर्क बहाल करने के लिए 248 टन बेली ब्रिज के हिस्से और 48 इंजीनियरों को हवाई मार्ग से श्रीलंका भेजा गया।
भारतीय वायुसेना और नौसेना के हेलिकॉप्टरों ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, सैनिकों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह सहायता संकट की घड़ी में श्रीलंका के प्रति भारत की मजबूत और भरोसेमंद प्रतिबद्धता को दर्शाती है।





