इस्राइल-ईरान संघर्ष में मनोवैज्ञानिक जंग का नया मोर्चा, साइबर हमलों से टीवी चैनल और इंटरनेट बने हथियार

ईरान और इस्राइल के बीच जारी सीधा टकराव अब सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। जहां एक ओर इस्राइल ने गुरुवार को ईरान के अराक स्थित परमाणु संयंत्र को निशाना बनाए जाने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने भी सीधे इस्राइल के प्रमुख शहरों पर हमले तेज कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरानी हमलों में इस्राइल की स्टॉक एक्सचेंज इमारत को नुकसान पहुंचा है और बीरशेबा शहर के एक अस्पताल में भी भारी तबाही हुई है।
इस युद्ध के बीच अब दोनों देशों के बीच एक नई जंग भी उभरकर सामने आई है — मनोवैज्ञानिक युद्ध यानी साइ-ऑप्स (Psychological Operations)। दोनों ही पक्ष अब केवल मिसाइलों या हवाई हमलों के जरिए नहीं, बल्कि साइबर और मनोवैज्ञानिक हथियारों के जरिए भी एक-दूसरे को निशाना बना रहे हैं।
बुधवार को ईरान में अचानक टेलीविजन प्रसारण बाधित हो गया। इसके बाद कई चैनलों पर 2022 के महिला आंदोलनों से जुड़े पुराने वीडियो चलने लगे। इन वीडियो में महिलाओं और युवाओं को शासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए दिखाया गया, जो महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे देश में फैले विद्रोह का हिस्सा थे।
ईरान के प्रमुख अखबार ‘हमशहरी’ ने अपने टेलीग्राम चैनल पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें टीवी चैनल हैक होने की घटना को दिखाया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकरों ने यह संदेश भी प्रसारित किया कि लोग शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरें। कुछ देर बाद जब टीवी प्रसारण दोबारा नियंत्रण में आया तो दर्शकों को एक चेतावनी संदेश दिखाया गया— “यहूदी दुश्मनों (इस्राइल) की ओर से साइबर हमले के कारण सैटेलाइट ट्रांसमिशन बाधित हुआ है।”
इस साइबर हमले के बाद ईरान ने इस्राइल पर मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इस्राइल उनके देश में साइबर माध्यमों के जरिए दुष्प्रचार फैलाने की कोशिश कर रहा है और आम नागरिकों के इंटरनेट को सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
इसके जवाब में ईरान सरकार ने देशभर में इंटरनेट सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं। ब्रिटेन आधारित निगरानी समूह नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान ने लगभग पूरे देश में इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया है।
इस्राइल और ईरान के बीच जारी यह युद्ध अब केवल सैन्य सीमा तक सीमित नहीं रहा। इसमें साइबर हमलों, संचार माध्यमों की हैकिंग और इंटरनेट सेंसरशिप जैसे नए आयाम जुड़ चुके हैं, जो इस संघर्ष को और भी पेचीदा बना रहे हैं। दोनों देशों की तरफ से अभी तक संघर्ष रोकने की कोई पहल नहीं दिख रही है, जिससे यह अंदेशा गहरा रहा है कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।





