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फैक्ट चेक: लखनऊ की नहीं है पिघलती हुई ट्रैफिक सिग्नल की यह तस्वीर, जानिए पूरा सच

फैक्ट चेक: लखनऊ की नहीं है पिघलती हुई ट्रैफिक सिग्नल की यह तस्वीर, जानिए पूरा सच

उत्तर भारत के कई इलाके इस समय भीषण गर्मी से हाल बेहाल हैं। इसी बीच ट्रैफिक सिग्नल की एक तस्वीर शेयर कर कहा जा रहा है कि तेज गर्मी के चलते लखनऊ में एक ट्रैफिक सिग्नल पिघल गया। फेसबुक यूजर्स लिख रहे हैं कि लखनऊ के हज़रत गंज चौराहे पर सूर्य देव का पारा इतना हाई हुआ कि ट्रैफिक लाइट पिघल गई, लेकिन ये सोचने वाली बात है कि ट्रैफिक लाइट सूरज की गर्मी से पिघला है या घटिया क्वालिटी का नतीजा है, मुस्कुराइए कि आप लखनऊ में है या शर्माइए कि आप लखनऊ में हैं, जो उचित लगे वह हो जाइए गा।  

फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

 

फैक्ट चेक:

न्यूज़मोबाइल की पड़ताल में हमने जाना कि वायरल तस्वीर हालिया दिनों की नहीं बल्कि पुरानी है साथ ही इसका लखनऊ से कोई संबंध नहीं  .

लखनऊ में तेज गर्मी की वजह से ट्रैफिक सिग्नल के पिघल जाने का दावा करती इस तस्वीर का सच जानने के लिए हमने इसे गूगल रिवर्स की मदद से खोजा। इस दौरान हमें कोई ऐसी मीडिया रिपोर्ट नहीं मिली जो यह दावा करती हो कि यह तस्वीर लखनऊ की है।

पड़ताल के दौरान कुछ कीवर्ड्स की सहायता से गूगल सर्च करने पर हमें 31 अगस्त 2022 को एक ट्विटर यूजर द्वारा शेयर किए गए ट्वीट में यह तस्वीर मिली। हालांकि यह ट्विटर यूजर भारत के नहीं हैं।

पड़ताल के दौरान मालूम चला कि 10 जून को एक फेसबुक यूजर द्वारा भी इस तस्वीर को शेयर किया गया है। हालांकि यूजर ने इस तस्वीर को टेक्सास का बताया है। फेसबुक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

खोजने पर हमें एक अन्य फेसबुक यूजर का एक पोस्ट मिला। इस पोस्ट को 8 जून को शेयर करते हुए सिग्नल की तस्वीर को वेगास का बताया गया है। फसबूक के वायरल पोस्ट का लिंक यहाँ देखें।

इस तरह हमारी पड़ताल से यह साबित हो जाता है कि सिग्नल की यह वायरल तस्वीर हालिया दिनों की नहीं है। यह तस्वीर 2022 या उससे पहले इंटरनेट पर मौजूद है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस तस्वीर को अलग अलग देशों का बताकर शेयर किया है। लेकिन इतना तय है कि यह तस्वीर न तो लखनऊ की है और न ही हालिया दिनों की। हालांकि हम यह नहीं कह सकते कि इस तस्वीर को कब और कहां क्लिक किया गया था।

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Nupendra Singh

A rapid increase in the rate of fake news and its ill effect on society encourages me to work as a fact-checker in NewsMobile. I believe one should always check the facts before sharing any information with others. I have gained two years of experience in fact-checking

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