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गुलज़ार साहब के 85 वें जन्मदिन पर जानिए उनके जीवन के कुछ अनसुने किस्से !

गुलजार एक ऐसा नाम है जिसने अपनी कलम के दम पर अपने लिए एक बड़ा मुकाम बनाया. वैसे तो गुलजार की पहचान प्रसिद्ध गीतकार के रूप में है लेकिन उन्होंने पटकथा लेखन, फिल्म निर्देशन, नाट्यकला, कविता लेखन में भी महारत हासिल है.

देश के सबसे चर्चित फंकार आज 85 साल के हो गए हैं. गुलजार साहब का जन्‍म आजादी से पूर्व पाकिस्‍तान में आज (18 अगस्‍त 1934) ही के दिन हुआ था.

गुलज़ार अपने पिता माखन सिंह कालरा की दूसरी पत्नी सुजान कौर की इकलौती संतान हैं. जब वह छोटे थे, तभी उनकी मां का इंतकाल हो गया था. देश के विभाजन के वक्त उनका परिवार पंजाब के अमृतसर में आकर बस गया. इसके बाद गुलज़ार मुंबई आ गए.

मुंबई आकर गुलजार ने एक गैरेज में बतौर मैकेनिक काम करना शुरू कर दिया. उन्हें बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक था। अपने शौक के कारण ही उन्होंने मैकेनिक का काम छोड़ दिया और फिल्म इंडस्ट्री का रुख किया. गुलजार मशहूर फिल्म निर्देशक बिमल राय, ह्रषिकेश मुखर्जी और हेमंत कुमार के सहायक के रूप में काम करने लगे.

गुलज़ार ने एसडी बर्मन की फिल्म ‘बंदिनी’ से बतौर गीत लेखक अपने करियर की शुरुआत की.

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आंधी, मौसम, मिर्जा गालिब (टीवी सीरीज), किरदार जैसी फिल्‍मों का निर्देशन करने वाले गुलजार ने बॉलीवुड की कई फिल्‍मों के लिए गीत लिखे हैं.

1973 में गीतकार गुलजार ने अभिनेत्री राखी से शादी की थी. शादी के कुछ समय बाद ही उनकी बेटी मेघना पैदा हुईं जोकि आज बॉलीवुड निर्देशक हैं. उन्‍होंने राजी और तलवार जैसी फिल्‍में बनाई हैं. शादी के कुछ वक्‍त बाद ही राखी और गुलजार के बीच दूरियां आ गईं और दोनों अलग हो गए.

राखी और गुलजार के अलग होने की वजह एक फिल्‍म थी. गुलजार चाहते थे कि शादी के बाद राखी फिल्‍मों में काम न करें, लेकिन राखी ने फिल्‍म कभी-कभी (1976) में काम करने के लिए हामी भर ली और शूटिंग शुरू कर दी. हालांकि 40 साल से अलग अलग रहने के बाद भी उन्‍होंने तलाक नहीं लिया है.

उनके इस योगदान के लिए उन्‍हें 2004 में पद्मभूषण से नवाजा गया था. इसके अलावा बीस बार फिल्मफेयर और पांच बार राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम कर चुके हैं. इसके साथ ही 2010 में उन्हें स्लमडॉग मिलेनियर के गाने ‘जय हो’ के लिए ग्रैमी अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है. वहीं गुलजार को प्रतिष्ठित दादा साहब फालके पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है.

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