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PM मोदी का ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड दौरा क्यों है खास? इंडो-पैसिफिक में भारत की बड़ी रणनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक राजनीति, व्यापार और सुरक्षा का अहम केंद्र बन चुका है। इस यात्रा के दौरान भारत दोनों देशों के साथ आर्थिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर देगा।

पीएम मोदी 9-10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया और 10-11 जुलाई को न्यूजीलैंड का दौरा करेंगे। यह यात्रा भारत की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह भरोसेमंद साझेदारों के साथ मिलकर आर्थिक मजबूती, तकनीकी विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा को आगे बढ़ाना चाहता है।

ऑस्ट्रेलिया के साथ मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी

पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देश Quad समूह के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में खुले एवं सुरक्षित समुद्री क्षेत्र के समर्थन में साथ काम कर रहे हैं।

दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में साझेदारी बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

क्रिटिकल मिनरल्स और ग्रीन एनर्जी पर नजर

ऑस्ट्रेलिया के पास लिथियम, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े भंडार हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी हैं।

भारत के लिए इन संसाधनों तक सुरक्षित पहुंच ऊर्जा सुरक्षा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए अहम है। इसके अलावा दोनों देश हाइड्रोजन एनर्जी, रिन्यूएबल एनर्जी और क्लीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा सकते हैं।

भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार में बढ़ोतरी

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 25 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुंच चुका है। India-Australia Economic Cooperation and Trade Agreement (ECTA) के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिली है।

इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, खनन, वित्तीय सेवाओं और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

न्यूजीलैंड के साथ नए आर्थिक अवसर

पीएम मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा भी कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच व्यापार को नई दिशा देने के लिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत जहां दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है, वहीं न्यूजीलैंड कृषि, फूड प्रोसेसिंग, शिक्षा और इनोवेशन के क्षेत्र में मजबूत स्थिति रखता है।

दोनों देश कृषि, शिक्षा, रिसर्च और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर सकते हैं।

टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन पर बढ़ेगा सहयोग

21वीं सदी में देशों के रिश्ते अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है।

भारत ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ मिलकर मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।

भारतीय समुदाय निभा रहा अहम भूमिका

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भारतीय समुदाय दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। बड़ी संख्या में भारतीय छात्र, प्रोफेशनल्स और कारोबारी इन देशों में मौजूद हैं।

पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय से मुलाकात भी रिश्तों को और मजबूत करने का माध्यम बनेगी।

इंडो-पैसिफिक में भारत की बढ़ती भूमिका

PM मोदी का ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरा भारत की वैश्विक रणनीति को दर्शाता है। भारत आर्थिक विकास, तकनीकी क्षमता और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में इन देशों के साथ लंबे समय की साझेदारी बनाना चाहता है।

यह यात्रा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक मंच पर उसकी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत कर सकती है।

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