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भारत के रूसी तेल आयात पर लग सकती है रोक! ट्रंप प्रशासन के संकेत से बढ़ी चिंता

India Russian Oil Imports: भारत के लिए रूस से सस्ते कच्चे तेल (Russian Crude Oil) का आयात आने वाले समय में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि रूस से तेल खरीदने के लिए दी गई छूट (Waiver) को भविष्य में समाप्त किया जा सकता है। इससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र और तेल आयात रणनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

क्या कहा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने?

बहरीन दौरे के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि रूस से तेल आयात की अनुमति देने वाली छूट को जारी रखना या समाप्त करना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्णय पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक तेल बाजार की स्थिति को देखते हुए अमेरिका इस विकल्प पर लगातार विचार कर रहा है।

रुबियो के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो अमेरिका रूस पर प्रतिबंधों को और सख्ती से लागू कर सकता है।

जून में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा भारत का रूसी तेल आयात

वेसल-ट्रैकिंग डेटा फर्म Kpler के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है।

  • भारत रूस से प्रतिदिन लगभग 26 लाख बैरल तेल आयात कर रहा है।
  • यह देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 53.5 प्रतिशत है।
  • पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण भारतीय रिफाइनरियां रूस के सस्ते तेल पर अधिक निर्भर हो गई हैं।

क्यों महत्वपूर्ण है रूस का सस्ता तेल?

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने अपने तेल पर भारी छूट देना शुरू किया था। इसका लाभ भारत और चीन जैसे देशों ने उठाया।

भारत के लिए रूसी तेल महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि:

  • आयात लागत कम होती है।
  • घरेलू ईंधन कीमतों पर दबाव घटता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती है।
  • रिफाइनरियों का मुनाफा बढ़ता है।

यदि अमेरिका छूट समाप्त करता है, तो भारत को वैकल्पिक स्रोतों से महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट

हाल ही में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। तेल की कीमतें पहले के मुकाबले काफी नीचे आ गई हैं, जिससे अमेरिका को प्रतिबंध कड़े करने की अधिक गुंजाइश मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनी रहती है, तो अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ा सकता है।

भारत पर क्या होगा असर?

यदि रूस से तेल आयात पर प्रतिबंध या नई पाबंदियां लागू होती हैं, तो:

  • भारत की आयात लागत बढ़ सकती है।
  • पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
  • रिफाइनरियों के मार्जिन में कमी आ सकती है।
  • ऊर्जा सुरक्षा रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।

हालांकि अभी तक अमेरिका ने कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

अमेरिका की ओर से मिले संकेतों ने भारत के रूसी तेल आयात को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिबंध घोषित नहीं हुआ है, लेकिन यदि ट्रंप प्रशासन छूट समाप्त करने का फैसला करता है तो भारत को अपनी ऊर्जा आयात नीति में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार और अमेरिका के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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