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लखनऊ में मौत बनकर भड़की आग, 15 की जान गई; जांच में सामने आईं कई बड़ी लापरवाहियां

Lucknow Fire Tragedy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। तीन मंजिला व्यावसायिक इमारत में लगी आग में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। हादसे के बाद प्रशासन ने इमारत को सील कर दिया है, FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

इस हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और गेमिंग ज़ोन से जुड़े छात्र और युवा पेशेवर बताए जा रहे हैं।

हादसे के बाद क्या कार्रवाई हुई?

आग लगने के बाद पुलिस ने इमारत को सील कर दिया है और आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। फॉरेंसिक टीम और फायर विभाग घटनास्थल से सबूत जुटाने की तैयारी कर रहे हैं।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और उत्तर प्रदेश फायर सर्विस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। वहीं राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

फायर NOC नहीं थी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस भूखंड पर यह इमारत बनी थी, उसका उपयोग केवल आवासीय उद्देश्य के लिए स्वीकृत था। अधिकारियों के अनुसार भवन के पास फायर NOC नहीं थी।

फायर विभाग का कहना है कि भवन संचालकों ने कभी भी अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र के लिए आवेदन नहीं किया था।

बायोमेट्रिक लॉक बना जानलेवा?

हादसे के बाद यह आरोप भी सामने आया है कि इमारत के प्रवेश द्वार पर बायोमेट्रिक लॉकिंग सिस्टम लगा हुआ था। आशंका है कि इसी कारण अंदर फंसे लोगों को बाहर निकलने में देरी हुई और राहत-बचाव कार्य भी प्रभावित हुआ।

हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।

अवैध निर्माण पर पहले भी हुई थी कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में इस इमारत के खिलाफ अवैध निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण (Demolition) का आदेश जारी किया गया था। लेकिन कुछ ही महीनों बाद यह आदेश वापस ले लिया गया।

अब यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में ध्वस्तीकरण आदेश को रद्द किया गया था और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।

आग लगने की वजह अब भी स्पष्ट नहीं

हादसे के कारण को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। कुछ अधिकारियों का मानना है कि बेसमेंट में लगे LED होर्डिंग में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी हो सकती है।

वहीं दूसरी ओर कुछ अधिकारियों ने आशंका जताई है कि आग की शुरुआत भवन के AC डक्ट से हुई होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि उच्च स्तरीय जांच के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह सामने आएगी।

PM मोदी और राष्ट्रपति ने जताया दुख

हादसे पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर मामले की निगरानी शुरू कर दी है।

कई सवालों के जवाब अभी बाकी

लखनऊ अग्निकांड ने भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर इतनी बड़ी त्रासदी के लिए जिम्मेदार कौन है और क्या इसे रोका जा सकता था।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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