DRDO की बड़ी सफलता, भारत ने मिसाइल रक्षा प्रणाली और एंटी-शिप मिसाइल तकनीक का सफल परीक्षण किया

नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम और मध्यम दूरी की नौसैनिक एंटी-शिप मिसाइल तकनीक का सफल परीक्षण किया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता की जानकारी देते हुए बताया कि DRDO ने लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षण किए हैं। इन परीक्षणों के जरिए लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा और समुद्र में दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की बहु-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली ने अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक पहचानकर उन्हें नष्ट किया। इस परीक्षण से साबित हुआ है कि भारत अलग-अलग ऊंचाइयों और दूरी पर आने वाली दुश्मन मिसाइलों का पता लगाकर उन्हें हवा में ही मार गिराने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों से निपटने की क्षमता है।
इसके अलावा DRDO ने पहली बार नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल भारतीय नौसेना को समुद्र में दूर से ही दुश्मन के युद्धपोतों पर सटीक हमला करने की ताकत देगी और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत बनाएगी।
इस बीच, हैदराबाद में DRDO के एडवांस्ड वेपन सिस्टम कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के दौरान राजनाथ सिंह ने “मिशन सुदर्शन चक्र” का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित यह मिशन एक आधुनिक बहु-स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और नागरिक प्रतिष्ठानों को दुश्मन के मिसाइल हमलों से सुरक्षित रखना है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन सफल परीक्षणों से भारत की रक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी और देश की रणनीतिक सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।





