TMC को बड़ा झटका: राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक संकट और गहराता नजर आ रहा है। पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले ने तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस्तीफे के कुछ ही समय बाद सुष्मिता देव की असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मुलाकात की तस्वीर सामने आने से राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है।
राज्यसभा सदस्यता से भी दिया इस्तीफा
सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को भेजे पत्र में अपनी राज्यसभा सदस्यता से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह उनका व्यक्तिगत निर्णय है और इसके पीछे कोई दबाव नहीं है।
हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात पर क्या बोलीं सुष्मिता देव?
दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में सुष्मिता देव ने कहा कि वह उनसे मार्गदर्शन लेने गई थीं।
उन्होंने कहा,
“मैं असम के बराक वैली क्षेत्र से आती हूं और वहां के लोगों की सेवा करना चाहती हूं। हिमंत बिस्वा सरमा सही व्यक्ति हैं जो मुझे आगे की दिशा दिखा सकते हैं।”
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस राजनीतिक दल में शामिल होने जा रही हैं।
“दो नावों में सवार नहीं रह सकती”
सुष्मिता देव ने कहा कि राजनीति में हर बात सार्वजनिक नहीं की जा सकती, लेकिन वह ऐसी स्थिति में नहीं रहना चाहती थीं जहां एक पार्टी में रहकर दूसरी दिशा में काम करना पड़े।
उन्होंने कहा,
“मैं कभी किसी पार्टी में रहकर दूसरी पार्टी की सेवा नहीं कर सकती। इसलिए यह फैसला मेरा अपना है।”
कांग्रेस से TMC तक का सफर
53 वर्षीय सुष्मिता देव असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की बेटी हैं। वह कांग्रेस की महिला इकाई ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
साल 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। उस समय उन्होंने इसे सार्वजनिक जीवन का नया अध्याय बताया था।
सुष्मिता देव पहले असम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी रह चुकी हैं।
TMC में लगातार दूसरा बड़ा इस्तीफा
सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी पार्टी और संसद दोनों से इस्तीफा दिया था।
सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने इस्तीफे के साथ पार्टी नेतृत्व और पश्चिम बंगाल की राजनीति को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए थे।
बंगाल में बगावत से बढ़ी मुश्किलें
हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जाकर विपक्ष के नेता पद के लिए आधिकारिक उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया।
इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और गुटबाजी को खुलकर सामने ला दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे इस्तीफे तृणमूल कांग्रेस के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं।
आगे क्या?
सुष्मिता देव ने फिलहाल अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। हालांकि हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात और असम की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की इच्छा जाहिर करने के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सुष्मिता देव आने वाले दिनों में किस राजनीतिक दल का रुख करती हैं और असम की राजनीति में उनकी नई भूमिका क्या होगी।





