Israel-Iran Conflict: ईरान पर इजरायल के हमले के बाद क्या फिर भड़क सकता है बड़ा युद्ध? जानिए EIC सौरभ शुक्ला का विश्लेषण
Middle East Crisis: सीजफायर के बावजूद फिर बढ़ा तनाव

Israel-Iran Conflict: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। हालिया संघर्षविराम (Ceasefire) की कोशिशों के बीच इजरायली वायुसेना ने पश्चिमी और मध्य ईरान में ईरानी शासन से जुड़े सैन्य ठिकानों पर कथित हवाई हमले किए हैं। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में नए सिरे से युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।
इन घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए NewsMobile के Editor-in-Chief सौरभ शुक्ला ने कहा कि इजरायल की यह कार्रवाई काफी हद तक अपेक्षित थी, क्योंकि हाल ही में ईरान की ओर से मिसाइल हमले किए गए थे।
“टिट-फॉर-टैट” कार्रवाई, लेकिन खतरा अभी टला नहीं
सौरभ शुक्ला के अनुसार, मौजूदा घटनाक्रम को “टिट-फॉर-टैट” यानी जवाबी सैन्य कार्रवाई के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोनों देशों के बीच हमलों का सिलसिला जारी रहता है, तो पूरा क्षेत्र एक बार फिर बड़े युद्ध की चपेट में आ सकता है।
उन्होंने कहा कि संघर्षविराम पहले ही काफी नाजुक स्थिति में है और लगातार सैन्य प्रतिक्रियाएं इसे पूरी तरह समाप्त कर सकती हैं।
तेल की कीमतों में उछाल, वैश्विक बाजार चिंतित
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे दुनिया भर में महंगाई और ईंधन संकट गहरा सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री ने कई देशों से की आपात बातचीत
तनाव बढ़ने के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान, ब्रिटेन, फ्रांस, मिस्र, कतर और तुर्की के विदेश मंत्रियों से संपर्क किया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अराघची ने बातचीत के दौरान दावा किया कि ईरान की हालिया कार्रवाई लेबनान में इजरायल की कथित गतिविधियों और संघर्षविराम उल्लंघन के जवाब में की गई।
सौरभ शुक्ला के मुताबिक, ईरान के भीतर भी दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर सरकार पर सख्त रुख अपनाने का दबाव बना रहे हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे सवाल
सौरभ शुक्ला ने पाकिस्तान की मध्यस्थता क्षमता पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि केवल पाकिस्तान के भरोसे शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाना प्रभावी नहीं होगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि भारत समेत कई प्रभावशाली देशों को एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक पहल का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, जिससे दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली और स्थायी समाधान की दिशा में प्रगति हो सके।
ट्रंप चाहते हैं कूटनीतिक समाधान
विश्लेषण के दौरान सौरभ शुक्ला ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अभी भी कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयासरत हैं।
उनके अनुसार, अमेरिका एक ऐसे ढांचे पर काम कर रहा है जिसमें संघर्षविराम को आगे बढ़ाने के साथ-साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं का समाधान भी शामिल हो सकता है।
हवाई सेवाएं और वैश्विक व्यापार प्रभावित
बढ़ते तनाव का असर विमानन क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है। कई एयरलाइंस ने उड़ानों का मार्ग बदल दिया है या कुछ सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं।
सौरभ शुक्ला ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक व्यापार, पर्यटन, एयरलाइन उद्योग और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।
इजरायल और ईरान के बीच ताजा सैन्य गतिविधियों ने एक बार फिर दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि फिलहाल दोनों पक्ष सीमित जवाबी कार्रवाई की बात कर रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो मिडिल ईस्ट एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका, भारत और अन्य वैश्विक शक्तियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।





