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पेपर लीक पर सख्त कानून को लेकर आज संसद में होगी बड़ी बहस, विपक्ष ने पेश किए 93 संशोधन

देशभर में परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर जारी विवाद के बीच आज संसद में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill पर अहम चर्चा होने जा रही है। यह विधेयक परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान करता है। विपक्ष ने इस बिल में 93 संशोधन प्रस्तावित किए हैं, जिससे लोकसभा में जोरदार बहस होने की संभावना है।

विपक्ष के विरोध के बीच आज होगी चर्चा

सोमवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में संशोधन विधेयक पेश किया था, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण उस पर चर्चा नहीं हो सकी। विपक्ष ने 20 जुलाई के छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग को लेकर सरकार को घेरा।

इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों से बातचीत की। सहमति बनने के बाद आज इस विधेयक पर लगभग छह घंटे चर्चा का समय तय किया गया है।

नए कानून में क्या होंगे बड़े बदलाव?

सरकार का कहना है कि यह संशोधन 2024 के मौजूदा कानून को और अधिक प्रभावी बनाएगा।

प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार—

  • पेपर लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने पर कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की जेल हो सकती है।
  • दोषियों पर ₹50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
  • परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता कंपनियों पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • ऐसी कंपनियों को 8 वर्षों तक सार्वजनिक परीक्षाओं से बाहर रखा जा सकेगा।
  • मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और समयबद्ध जांच का प्रावधान किया गया है, ताकि तीन महीने के भीतर मुकदमे पूरे किए जा सकें।

छात्र आंदोलन के बाद आया संशोधन

यह विधेयक ऐसे समय लाया गया है जब हाल ही में परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में बड़े स्तर पर छात्र आंदोलन हुआ था। आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया और केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार का भरोसा दिया।

सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

विपक्ष सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में

विपक्षी दलों का कहना है कि केवल नया कानून लाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पहले हुई घटनाओं की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके सहित कई दल संसद में सरकार से छात्र आंदोलनों और कथित पुलिस कार्रवाई पर जवाब मांग सकते हैं।

विपक्ष का आरोप है कि पहले से मौजूद कानून का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया, इसलिए बार-बार पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं।

छात्रों के लिए क्यों अहम है यह बिल?

यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो सार्वजनिक परीक्षाओं में धोखाधड़ी, पेपर लीक और संगठित परीक्षा माफिया के खिलाफ कार्रवाई पहले से कहीं अधिक सख्त हो जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी और छात्रों का भरोसा मजबूत होगा।

अब सभी की नजर संसद में होने वाली बहस पर है, जहां सरकार और विपक्ष दोनों इस महत्वपूर्ण विधेयक पर अपना पक्ष रखेंगे। क्या यह नया कानून परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव ला पाएगा, इसका फैसला संसद की चर्चा और आगे की प्रक्रिया के बाद होगा।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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