Norway Chess 2026: प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, मैग्नस को दूसरी बार हराकर बनाया बड़ा रिकॉर्ड
19 साल बाद दोहराया गया ऐतिहासिक कारनामा

Norway Chess 2026: भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंदा ने नॉर्वे चेस 2026 में इतिहास रचते हुए विश्व नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को एक ही टूर्नामेंट में दूसरी बार हराया। चेन्नई के 20 वर्षीय खिलाड़ी ने क्लासिकल मुकाबले में कार्लसन को मात देकर 19 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया।
इससे पहले 27 मई को तीसरे राउंड में प्रज्ञानानंदा ने सफेद मोहरों के साथ कार्लसन को हराया था। अब आठवें राउंड में काले मोहरों से जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी शानदार फॉर्म का प्रदर्शन किया।
विश्वनाथन आनंद के रिकॉर्ड की बराबरी
एक ही क्लासिकल टूर्नामेंट में कार्लसन को दो बार हराने वाले प्रज्ञानानंदा 2007 के बाद पहले खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले यह उपलब्धि भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने लीनेरेस इंटरनेशनल चेस टूर्नामेंट 2007 में हासिल की थी।
यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि क्लासिकल फॉर्मेट में कार्लसन को लगातार दो बार हराना बेहद कठिन माना जाता है।
जीत के बाद क्या बोले प्रज्ञानानंदा?
मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा कि इस चरण में उनके लिए किसी खास खिलाड़ी को हराने से ज्यादा महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में जीत दर्ज करना है। उन्होंने बताया कि मुकाबला लंबे समय तक ड्रॉ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था, लेकिन अंत में कार्लसन की एक गलती ने उन्हें जीत का मौका दे दिया।
भारतीय ग्रैंडमास्टर ने कार्लसन की रक्षात्मक क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के खिलाफ हर अवसर का सही उपयोग करना जरूरी होता है।
टाइम मैनेजमेंट पर करना चाहते हैं सुधार
प्रज्ञानानंदा ने अपनी मौजूदा फॉर्म पर संतोष जताया, लेकिन साथ ही माना कि आने वाले मुकाबलों में उन्हें अपने समय प्रबंधन में और सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट के अंतिम चरण में छोटी-छोटी गलतियां भी बड़ा अंतर पैदा कर सकती हैं।
अंक तालिका में तीसरे स्थान पर प्रज्ञानानंदा
नॉर्वे चेस 2026 की अंक तालिका में प्रज्ञानानंदा फिलहाल 12 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर हैं। अमेरिका के वेस्ली सो 14 अंकों के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं, जबकि फ्रांस के अलीरेज़ा फिरोज़जा 13 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
खिताब की दौड़ अभी पूरी तरह खुली हुई है और अंतिम राउंड्स में स्थिति बदल सकती है।
आगे किससे होगा मुकाबला?
आराम दिवस के बाद प्रज्ञानानंदा का अगला मुकाबला मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश से होगा। इसके बाद वह अंतिम राउंड में जर्मनी के विंसेंट कीमर का सामना करेंगे।
अगर भारतीय ग्रैंडमास्टर अपनी जीत की लय बरकरार रखते हैं, तो उनके पास नॉर्वे चेस 2026 का खिताब जीतने का सुनहरा मौका होगा।
भारतीय शतरंज के लिए बड़ी उपलब्धि
मैग्नस कार्लसन पर दूसरी जीत के साथ प्रज्ञानानंदा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय शतरंज की नई पीढ़ी विश्व मंच पर लगातार मजबूत होती जा रही है। उनकी यह उपलब्धि भारतीय शतरंज के लिए गर्व का क्षण है और आने वाले वर्षों के लिए एक बड़ा संकेत भी।





