
भारतीय मुद्रा बाजार से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मंगलवार, 2 जून 2026 को अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) के मुकाबले भारतीय रुपया 10 पैसे टूटकर 95.29 (provisional) के स्तर पर बंद हुआ है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और डॉलर की मजबूती के कारण घरेलू मुद्रा पर यह दबाव देखा गया है।
INR गिरने के मुख्य कारण
विदेशी मुद्रा व्यापारियों (Forex Traders) के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई महत्वपूर्ण वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: वैश्विक तेल बेंचमार्क, ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) के दामों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर भारतीय रुपए पर पड़ा है। ग्लोबल क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
मजबूत अमेरिकी डॉलर: सुरक्षित निवेश (Safe-Haven Inflows) के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे डॉलर को मजबूती मिली है।
विदेशी फंड्स की निकासी: भारतीय बाजारों से बड़े पैमाने पर विदेशी फंड्स की निकासी (Foreign Fund Outflows) हो रही है, जिसने निवेशकों की धारणा (Investor Sentiments) को काफी प्रभावित किया है।
बाजार और निवेशकों पर प्रभाव
INR की इस कमजोरी का सीधा असर देश के आयात पर पड़ सकता है, विशेषकर कच्चे तेल के आयात पर, जिससे देश में महंगाई बढ़ने का जोखिम रहता है। इसके अतिरिक्त, विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने घरेलू इक्विटी बाजार के सेंटीमेंट्स को भी कमजोर किया है। आने वाले दिनों में बाजार विश्लेषकों की नजरें रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी रहेंगी।




