CBSE OSM सिस्टम पर बढ़ा विवाद, संसद की समिति ने चेयरमैन और शिक्षा सचिव को बुलाया

कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर उठे विवाद के बीच संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति ने बड़ा कदम उठाया है। समिति ने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़ी शिकायतों की समीक्षा के लिए स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार और CBSE चेयरमैन राहुल सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है।
छात्रों और अभिभावकों की ओर से मूल्यांकन में कथित तकनीकी गड़बड़ियों, अंकन में विसंगतियों और रिजल्ट के बाद सत्यापन प्रक्रिया में आई समस्याओं को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
CBSE ने हाल के वर्षों में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की है। इस प्रणाली के तहत परीक्षकों द्वारा डिजिटल माध्यम से कॉपियों की जांच की जाती है।
हालांकि, इस वर्ष कई छात्रों ने आरोप लगाया कि OSM प्रणाली में तकनीकी खामियों के कारण उनके अंकों पर असर पड़ा। सोशल मीडिया और छात्र मंचों पर भी इस संबंध में बड़ी संख्या में शिकायतें सामने आई हैं।
छात्रों की भी सुनी जाएगी बात
संसदीय समिति ने केवल CBSE अधिकारियों को ही नहीं, बल्कि छात्रों के प्रतिनिधियों को भी बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। छात्र अपनी समस्याएं और अनुभव सीधे समिति के सामने रख सकेंगे।
इससे समिति को मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने में मदद मिलेगी।
CERT-In को भी बुलाया गया
डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की सुरक्षा और विश्वसनीयता की जांच के लिए भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) के महानिदेशक को भी तलब किया गया है।
समिति यह जानना चाहती है कि कहीं तकनीकी या साइबर सुरक्षा संबंधी कोई समस्या तो नहीं थी, जिसने मूल्यांकन प्रक्रिया को प्रभावित किया हो।
तीन-भाषा फॉर्मूला पर भी होगी चर्चा
कांग्रेस सांसद Digvijaya Singh की अध्यक्षता वाली समिति इस बैठक में कक्षा 9वीं और 10वीं में तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने के मुद्दे पर भी विचार-विमर्श करेगी।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर रहेगा फोकस
समिति का उद्देश्य यह मूल्यांकन करना है कि तकनीक आधारित परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू किया गया या नहीं और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद हैं या नहीं।
बैठक के बाद पारदर्शिता, जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें सामने आ सकती हैं।





