
भारतीय मुद्रा बाजार में आज बड़ी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले INR अपने सर्वकालिक निचले स्तर से रिकवर हुआ है। गुरुवार के कारोबारी सत्र के अंत में रुपया 49 पैसे की मजबूती के साथ 96.37 के स्तर पर बंद हुआ।
रुपये में रिकवरी के मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में आई यह रिकवरी मुख्य रूप से निम्नलिखित कारकों के कारण है:
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतों में गिरावट देखी गई, जो कि 0.75% गिरकर 104.23 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रही थी। इससे आयातकों की डॉलर मांग कम हुई।
भू-राजनीतिक तनाव में कमी: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक मोर्चे पर तनाव कम होने के संकेत मिले हैं, जिससे निवेशकों का सेंटिमेंट सुधरा है।
केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप: माना जा रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये में आ रही भारी गिरावट को थामने के लिए बाजार में हस्तक्षेप किया है, जिससे रुपये को सहारा मिला है।
बाजार का भविष्य और चिंताएं
हालांकि आज रुपये ने राहत की सांस ली है, लेकिन चुनौतियां अभी बरकरार हैं। डीबीएस बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में अब तक रुपया 6% से अधिक टूट चुका है। विशेषज्ञों ने साल के शेष भाग के लिए USD/INR के लिए 95-100 का पूर्वानुमान (Forecast) रखा है।
इसके अलावा, फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने बुधवार को भारतीय शेयर बाजार से 1,597.35 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की है, जो बाजार के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है। अब निवेशकों की नजरें आगामी RBI की मौद्रिक नीति समीक्षा पर टिकी हैं।





