
नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र से पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi ने महिला सशक्तिकरण को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि देश महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि “मां और बहनों का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है।” पोस्ट में एक संस्कृत श्लोक भी शामिल किया गया, जिसमें समाज में महिलाओं की भूमिका को ज्ञान और जागरूकता फैलाने वाली शक्ति बताया गया।
आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।
व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्।
ता त्वामुषर्वसूयवो… pic.twitter.com/8KWT1WLSje
— Narendra Modi (@narendramodi) April 16, 2026
महिला आरक्षण विधेयक पर संसद में चर्चा
16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई (33%) आरक्षण देना है, जिसे 2029 के आम चुनाव से लागू करने की योजना है।
सरकार इस विधेयक के लिए सभी राजनीतिक दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। इससे पहले भी प्रधानमंत्री विपक्ष से इस प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील कर चुके हैं।
अन्य अहम विधेयक भी होंगे पेश
महिला आरक्षण विधेयक के अलावा सरकार संविधान संशोधन से जुड़े अन्य प्रस्ताव भी पेश कर सकती है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 शामिल हैं।
परिसीमन को लेकर विपक्ष की चिंता
जहां एक तरफ विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन कर रहा है, वहीं परिसीमन को इससे जोड़ने पर सवाल उठा रहा है। कई दलों का मानना है कि इससे राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
इस मुद्दे पर M. K. Stalin समेत कई नेताओं ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि प्रस्तावित बदलाव राज्यों के हितों को प्रभावित कर सकते हैं।
लोकसभा सीट बढ़ाने का प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने व्यापक सुधार के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
संसद का यह विशेष सत्र महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर निर्णायक साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में राजनीतिक सहमति और संख्या बल इस विधेयक के भविष्य को तय करेंगे।





