महिला आरक्षण और परिसीमन बिल आज संसद में पेश: क्या सरकार के पास है पर्याप्त संख्या?

संसद में आज महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े अहम विधेयक पेश किए जाने हैं। सरकार का लक्ष्य 2029 लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 33% आरक्षण लागू करना है, लेकिन इसके लिए जरूरी संख्या को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला
सरकार जिन विधेयकों को पेश करने जा रही है, उनमें महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33% आरक्षण देने का प्रावधान है। इस प्रस्ताव को परिसीमन और जनगणना से जोड़ा गया है। यानी सीटों के नए निर्धारण के बाद ही आरक्षण लागू होगा।
परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करने की योजना है, जिसके आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्गठन किया जाएगा।
संसद में संख्या का गणित
संविधान संशोधन वाले इन विधेयकों को पारित कराने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। लोकसभा में यह आंकड़ा करीब 360 सीटों का है, जबकि सत्तारूढ़ एनडीए के पास लगभग 293 सांसद हैं, यानी वह बहुमत से 67 सीट पीछे है।
राज्यसभा में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण है, जहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 सदस्यों की जरूरत है, जबकि एनडीए के पास करीब 142 सदस्य हैं।
विपक्ष का रुख
विपक्ष ने महिला आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन किया है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताई है। विपक्ष का कहना है कि इससे सीटों के बंटवारे में असंतुलन आ सकता है और कुछ राज्यों को नुकसान हो सकता है।
कुछ दलों का यह भी आरोप है कि परिसीमन की प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए किया जा सकता है।
आगे क्या होगा
अगर ये विधेयक पारित होते हैं, तो लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर 800 से ज्यादा हो सकती हैं। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों में भी सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना है।
सरकार का दावा है कि उसे विधेयकों को पास कराने के लिए पर्याप्त समर्थन मिलेगा, लेकिन अंतिम स्थिति संसद में चर्चा और मतदान के बाद ही साफ होगी।
महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े ये विधेयक भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हालांकि, इन्हें पारित कराने के लिए सरकार को संसद में संख्या का संतुलन साधना होगा, जो फिलहाल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।





