भारतराजनीति

850 तक बढ़ सकती हैं लोकसभा सीटें? परिसीमन से बदल सकता है राजनीतिक संतुलन

भारत की राजनीति में एक बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Lok Sabha की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक की जा सकती है। अगर ऐसा होता है, तो न सिर्फ सांसदों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि संसद में क्षेत्रीय संतुलन भी बदल सकता है।

क्या है परिसीमन (Delimitation)?

परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्वितरण। सरल शब्दों में, जिस राज्य की आबादी ज्यादा होती है, उसे ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलता है। भारत में आखिरी बार बड़े स्तर पर परिसीमन 1970 के दशक में हुआ था और फिलहाल सीटों की संख्या 2026 तक फ्रीज़ है। अब 2011 की जनगणना के आधार पर नए सिरे से परिसीमन की चर्चा हो रही है।

543 से 850 सीटें: क्या है प्रस्ताव?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक किया जा सकता है। हालांकि, यह अभी एक प्रोजेक्टेड आंकड़ा है और अंतिम फैसला परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही होगा।

किन राज्यों को हो सकता है फायदा?

अगर सीटें बढ़ती हैं, तो कुछ बड़े राज्यों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। उत्तर प्रदेश में सीटें 80 से बढ़कर 140 तक जा सकती हैं, बिहार में 40 से 73, राजस्थान में 25 से 48, मध्य प्रदेश में 29 से 51 और महाराष्ट्र में 48 से 79 तक पहुंच सकती हैं। इससे इन राज्यों की संसद में हिस्सेदारी बढ़ सकती है।

किन राज्यों की हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है?

कुछ राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ने के बावजूद उनकी कुल हिस्सेदारी तुलनात्मक रूप से कम हो सकती है। इनमें तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। इसका कारण इन राज्यों में अपेक्षाकृत कम जनसंख्या वृद्धि माना जा रहा है।

उत्तर बनाम दक्षिण: बदल सकता है संतुलन

अगर इन प्रोजेक्शन्स को देखें, तो संसद में क्षेत्रीय संतुलन बदल सकता है। उत्तर भारत की हिस्सेदारी बढ़ सकती है, जबकि दक्षिण भारत की हिस्सेदारी में कुछ कमी आ सकती है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

राजनीतिक बहस क्यों तेज हुई?

दक्षिण भारत के कई नेता इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जता चुके हैं। उनका कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया, उन्हें अब कम प्रतिनिधित्व मिल सकता है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिनिधित्व का आधार जनसंख्या ही होना चाहिए।

अभी अंतिम फैसला नहीं

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी आंकड़े अभी प्रोजेक्टेड हैं और अंतिम तस्वीर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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