ट्रंप का ईरान पर बड़ा बयान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नाकेबंदी का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान देते हुए उसे “निराश” (desperate) बताया है। यह बयान ऐसे समय आया है जब इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की उच्च स्तरीय वार्ता विफल हो गई। इसके साथ ही ट्रंप ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री नाकेबंदी (Maritime Blockade) का ऐलान कर दिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।
बातचीत विफल होने के बाद भड़का तनाव
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ परमाणु मुद्दों और होर्मुज जलमार्ग को लेकर हुई बातचीत पूरी तरह असफल रही। यह वार्ता ईरान की क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तरीय बैठक मानी जा रही थी, लेकिन किसी भी समझौते पर सहमति नहीं बन सकी।
उन्होंने दावा किया कि अब ईरान न तो तेल बेच पाएगा और न ही परमाणु हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ा सकेगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी का ऐलान
अमेरिकी राष्ट्रपति ने घोषणा की कि लगभग रात 7:30 बजे (IST) से समुद्री नाकेबंदी लागू की जाएगी। यह कदम ईरान के बंदरगाहों की ओर जाने और वहां से आने वाले समुद्री यातायात को प्रभावित करेगा।
हालांकि अमेरिकी सेना के अनुसार, यह प्रतिबंध केवल ईरान से जुड़े जहाजों पर लागू होगा और अन्य देशों के व्यापारिक जहाजों को प्रभावित नहीं किया जाएगा।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य, नौसेना और वायु क्षमता “पूरी तरह नष्ट” हो चुकी है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान ने किया पलटवार
ईरान के नौसेना प्रमुख शाहराम इरानी ने अमेरिका के इस कदम को “बेतुका” बताते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरानी सेना अमेरिकी नौसेना की हर गतिविधि पर नजर रख रही है और किसी भी स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल भी संभावित तनाव को देखते हुए हाई अलर्ट पर है। आशंका जताई जा रही है कि ईरान की ओर से तेल अवीव पर जवाबी कार्रवाई हो सकती है।
क्षेत्र में सुरक्षा बलों को सतर्क कर दिया गया है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं।
NATO पर भी ट्रंप की टिप्पणी
ट्रंप ने अलग बयान में NATO पर भी नाराजगी जताई और सदस्य देशों के रक्षा खर्च पर सवाल उठाए। व्हाइट हाउस ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका के NATO से संभावित अलग होने पर चर्चा हुई है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। वार्ता विफल होने और समुद्री नाकेबंदी के ऐलान के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र को लेकर।





