आईपीएल शुरू होने से पहले कानूनी विवाद में फंसी महेंद्र सिंह धोनी की टीम चेन्नई सुपर किंग्स

क्रिकेट का सबसे बड़ा टूर्नामेंट माना जाने वाला IPL जल्द ही शुरू होने वाला है। लेकिन टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले ही चेन्नई सुपर किंग कानूनी विवाद में फंस गई है। दरअसल, फिल्म प्रोडक्शन कंपनी सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड ने सीएसके के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि टीम ने अपने प्रमोशनल वीडियो में उनकी फिल्मों के ऑडियो ट्रैक, बैकग्राउंड म्यूजिक और डायलॉग का बिना अनुमति इस्तेमाल किया।
यह विवाद उस वीडियो से जुड़ा है जिसे सीएसके ने अपनी नई जर्सी के प्रचार के लिए सोशल मीडिया पर जारी किया था। नोटिस मिलने के बाद टीम ने उस वीडियो को हटा दिया और बाद में दूसरे म्यूजिक के साथ दोबारा अपलोड कर दिया।
मद्रास हाई कोर्ट में दायर हुआ मामला
यह मामला मद्रास हाई कोर्ट में दायर किया गया है। याचिका में सन टीवी नेटवर्क ने कहा कि टीम ने उनकी फिल्मों जेलर, जेलर 2 और कुली के गानों और डायलॉग्स का इस्तेमाल बिना अनुमति के किया।
कंपनी का कहना है कि यह सारी सामग्री कॉपीराइट से सुरक्षित है और इसके इस्तेमाल के लिए पहले अनुमति लेना जरूरी होता है। आरोप यह भी लगाया गया कि इसी प्रमोशनल वीडियो के जरिए टीम ने अपनी जर्सी 2,399 रुपये में बेचने के लिए प्रचार किया, जिससे व्यावसायिक लाभ लिया गया।
नोटिस के बाद हटाया गया वीडियो
बताया जा रहा है कि यह वीडियो सामने आने के बाद फिल्म और क्रिकेट दोनों के फैंस का ध्यान इस ओर गया। कई लोगों ने वीडियो में इस्तेमाल हुए म्यूजिक और डायलॉग्स को पहचान लिया। इसके बाद सन टीवी नेटवर्क ने 1 मार्च को सीएसके को औपचारिक नोटिस भेजा और वीडियो को हटाने व उसके प्रसार को रोकने की मांग की।
कोर्ट में हुई सुनवाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील जे. रविंद्रन ने अदालत को बताया कि नोटिस मिलने के बाद सीएसके ने संबंधित कॉपीराइट सामग्री का उपयोग बंद कर दिया था। 13 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान प्रोडक्शन हाउस ने संगीतकार अनिरुद्ध रविचंद्र के साथ हुए समझौते की कॉपी भी अदालत में पेश की। इसमें बताया गया कि फिल्मों के संगीत के अधिकार उन्हें दिए गए हैं।
आगे भी जारी रहेगी सुनवाई
अदालत ने फिलहाल दोनों पक्षों की दलीलों पर ध्यान दिया है। अभी किसी भी पक्ष की ओर से किसी समझौते या अतिरिक्त कानूनी कदम की जानकारी नहीं दी गई है।
अब मद्रास हाई कोर्ट इस मामले में आगे भी सुनवाई करेगा और यह तय करेगा कि इस मामले में किसी तरह की रोक, जुर्माना या अन्य कानूनी कार्रवाई जरूरी है या नहीं।





