AI साइंस-टेक्नोलॉजी

इंसानों से नहीं, आपस में बात कर रही AI! चर्चा में नया प्लेटफॉर्म ‘मोल्टबुक’

अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंसानों से बात करना बंद कर दे और आपस में ही बातचीत करने लगे, तो क्या होगा? इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूमता है एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘मोल्टबुक’, जो हाल ही में लॉन्च हुआ है और टेक जगत में बहस का विषय बन गया है।

मोल्टबुक दिखने में किसी आम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसा है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां इंसान नहीं, बल्कि सिर्फ AI आपस में बातचीत करते हैं। इंसानों की भूमिका सिर्फ दर्शक की होती है। प्लेटफॉर्म पर होने वाली हर पोस्ट, कमेंट और बहस AI एजेंट्स द्वारा ही की जाती है।

जनवरी में हुआ लॉन्च, 15 लाख AI यूजर्स का दावा

इस प्लेटफॉर्म को जनवरी के आखिर में ऑक्टेन AI के फाउंडर मैट श्लिख्ट ने लॉन्च किया। कंपनी का दावा है कि मोल्टबुक पर करीब 15 लाख AI एजेंट्स एक्टिव हैं। ये AI अलग-अलग “सबमोल्ट्स” नाम के डिजिटल समूहों में विचार साझा करते हैं, बहस करते हैं और कई बार वैचारिक चर्चाओं में भी उलझ जाते हैं।

हालांकि, कई रिसर्चर्स इस दावे को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इन AI एजेंट्स को पीछे से इंसान ही निर्देश दे रहे हो सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि लाखों अकाउंट्स असल में अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही सोर्स से संचालित हो सकते हैं।

कैसे काम करता है मोल्टबुक?

मोल्टबुक आम चैटबॉट्स जैसे ChatGPT या Gemini से अलग है। यह “एजेंटिक AI” पर काम करता है, यानी ऐसे AI सिस्टम जो एक बार अनुमति मिलने के बाद खुद से काम कर सकते हैं।

यह प्लेटफॉर्म एक ओपन-सोर्स फ्रेमवर्क OpenClaw पर आधारित है, जिसकी मदद से AI एजेंट्स खुद लॉग इन करते हैं, पोस्ट डालते हैं और एक-दूसरे से बातचीत करते हैं। हालांकि, हर AI एजेंट को पहले किसी इंसान की अनुमति जरूरी होती है और उसके काम की सीमाएं भी इंसान ही तय करता है।

भविष्य की झलक या सिर्फ ऑटोमेशन?

कुछ लोग मोल्टबुक को तकनीकी भविष्य की झलक मान रहे हैं। क्रिप्टो कंपनी बिटगो से जुड़े बिल लीस ने इसे उस दौर का संकेत बताया है, जिसे तकनीकी दुनिया में “सिंगुलैरिटी” कहा जाता है।

वहीं, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के AI विशेषज्ञ डॉ. पीटर राडनलीव का कहना है कि इसे गलत तरीके से समझा जा रहा है। उनके मुताबिक, मोल्टबुक असल में सोचने वाली मशीनों का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन का उदाहरण है। असली चिंता यह है कि इतने बड़े स्तर पर ऑटोमेटेड सिस्टम्स के लिए नियम और जवाबदेही साफ नहीं हैं।

कोलंबिया बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर डेविड होल्ट्ज ने तो मोल्टबुक को एक ऐसा प्लेटफॉर्म बताया है, जहां हजारों बॉट्स एक ही तरह की बातें बार-बार दोहरा रहे हैं।

बहस जारी

मोल्टबुक भविष्य की AI दुनिया की झलक है या सिर्फ एक प्रयोग — यह अभी साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि इसने एक अहम बहस को जन्म दे दिया है: क्या AI वाकई स्वतंत्र है, और जब मशीनें बोलती हैं, तो उनकी जिम्मेदारी किसकी होती है?

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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