भारत की सफलता से दुनिया होगी और मजबूत: उर्सुला वॉन डेर लेयेन

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने सोमवार को कहा कि एक “सफल भारत” पूरी दुनिया को ज्यादा स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है। उनका यह बयान भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने वाले एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते से पहले आया है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन तीन दिन के भारत दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। उनके साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी मुख्य अतिथि रहे। गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने को लेकर वॉन डेर लेयेन ने इसे अपने जीवन का “सम्मानजनक अनुभव” बताया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “एक सफल भारत दुनिया को ज्यादा स्थिर, समृद्ध और सुरक्षित बनाता है। इससे हम सभी को फायदा होता है।”
It is the honor of a lifetime to be Chief Guests at the Republic Day celebrations.
A successful India makes the world more stable, prosperous and secure.
And we all benefit ↓ https://t.co/boeqFGv15Q
— Ursula von der Leyen (@vonderleyen) January 26, 2026
प्रधानमंत्री मोदी से होगी अहम मुलाकात
उर्सुला वॉन डेर लेयेन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंगलवार को शिखर वार्ता प्रस्तावित है। इस बैठक में भारत और यूरोपीय संघ के बीच रिश्तों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी।
भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता
भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत पूरी होने की घोषणा की जा सकती है। भारत आने से कुछ दिन पहले स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा था कि भारत और यूरोपीय संघ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं। उन्होंने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” यानी सभी समझौतों की सबसे बड़ी डील बताया।
उनके मुताबिक, यह समझौता करीब 2 अरब लोगों का बाजार तैयार करेगा, जो वैश्विक GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा होगा। उन्होंने कहा कि यह यूरोप को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते और गतिशील क्षेत्रों में भारत के साथ पहले कदम का फायदा देगा।
भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार EU
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारत और ईयू के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 135 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत की शुरुआत साल 2007 में हुई थी, लेकिन 2013 में यह बातचीत रुक गई थी। बाद में इसे 2022 में दोबारा शुरू किया गया।
इस संभावित समझौते को भारत-ईयू संबंधों में एक नए और महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।




