मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में मिली जगह, पीएम मोदी बोले- हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण

भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को एक और बड़ी मान्यता मिली है। मराठा साम्राज्य के किलों और उनकी सैन्य स्थापत्य कला को दर्शाने वाले ‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कर लिया गया है। यह भारत की 44वीं धरोहर है जिसे यह प्रतिष्ठित स्थान मिला है।इस उपलब्धि की घोषणा शुक्रवार को हुई, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने इसे लेकर खुशी और गर्व व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “जब हम गौरवशाली मराठा साम्राज्य की बात करते हैं, तो उसे सुशासन, सैन्य क्षमता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक कल्याण से जोड़ते हैं। यह साम्राज्य अन्याय के खिलाफ झुकने से इनकार करने वाले शासकों की प्रेरणादायक गाथा है।” उन्होंने कहा कि इस मान्यता से हर भारतीय उत्साहित है और सभी को इन ऐतिहासिक स्थलों को देखने जरूर जाना चाहिए।
यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्रे अजोले ने पीएम मोदी के पोस्ट को साझा करते हुए कहा, “प्रिय प्रधानमंत्री मोदी, मैं आपके और भारत के लोगों के साथ इस खुशी में शामिल हूं कि ‘भारत के मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ अब यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची का हिस्सा बन चुके हैं। ये किले अब पूरी मानवता की साझा विरासत हैं।” उन्होंने इसे भारत के लिए गर्व का क्षण बताया।
प्रत्येक भारतीय या सन्मानाने आनंदित झाला आहे.
या ‘मराठा मिलिटरी लँडस्केप्स’ मध्ये 12 भव्य किल्ल्यांचा समावेष असून, ज्यापैकी 11 महाराष्ट्रात तर १ तामिळनाडू मध्ये आहे.
जेव्हा आपण गौरवशाली मराठा साम्राज्याबद्दल बोलतो, तेव्हा आपण त्याचा संबंध सुशासन, लष्करी ताकद, सांस्कृतिक अभिमान… https://t.co/J7LEiOAZqy
— Narendra Modi (@narendramodi) July 12, 2025
‘मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स’ में कुल 12 किलों को शामिल किया गया है। इनमें से 11 किले महाराष्ट्र में स्थित हैं – साल्हेर, शिवनेरी, रायगढ़, राजगढ़, लोहगढ़, खंडेरी, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजय दुर्ग और सिंधुदुर्ग। वहीं, तमिलनाडु में स्थित एकमात्र किला जिंजी (Gingee Fort) भी इस सूची का हिस्सा बना है। ये सभी किले 17वीं से 19वीं सदी के बीच मराठा शासकों द्वारा निर्मित किए गए थे, जो उस समय की सैन्य रणनीति और स्थापत्य कौशल के प्रतीक हैं।
संस्कृति मंत्रालय ने इस उपलब्धि को भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी जीत बताया है। मंत्रालय के अनुसार, यह मान्यता भारत की ऐतिहासिक, स्थापत्य और सैन्य विरासत की विविधता और समृद्धि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने वाली है।
यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी. शर्मा ने कहा कि यह दिन खास तौर पर मराठी समुदाय और उन सभी लोगों के लिए गर्व का है, जिनकी सांस्कृतिक धरोहर अब वैश्विक स्तर पर सम्मानित हुई है। इस मौके पर यूनेस्को मुख्यालय में मौजूद भारतीय प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्य भारत का तिरंगा लेकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने।
मराठा साम्राज्य की सैन्य विरासत को मिली यह वैश्विक मान्यता न केवल भारत के गौरवशाली इतिहास को विश्व पटल पर स्थापित करती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है। यूनेस्को की यह घोषणा भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की वैश्विक पहचान को और मजबूत करती है।





