भारत पर परमाणु धमकी या आतंक के बहाने अब नहीं चलेंगे: एस. जयशंकर का दो टूक बयान

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क के मैनहैटन में भारत की स्थिति साफ शब्दों में दुनिया के सामने रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत अब किसी भी तरह की परमाणु धमकी या आतंकवाद के बहानों से डरने वाला नहीं है। अमेरिकी मैगजीन न्यूज़वीक को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “हम पर यह दबाव बनाने की कोशिश होती है कि अगर हम कोई कार्रवाई करें तो उसके बदले में परमाणु युद्ध छिड़ सकता है, इसलिए हमें चुप रहना चाहिए – लेकिन भारत अब ऐसे ‘न्यूक्लियर ब्लैकमेल’ के आगे झुकने वाला नहीं है।”
एस. जयशंकर का यह बयान जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के दो महीने बाद आया है, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। उन्होंने इस हमले को एक ‘युद्ध जैसा कृत्य’ करार दिया जिसका मकसद कश्मीर की रीढ़ कही जाने वाली टूरिज्म इंडस्ट्री को तोड़ना था। उन्होंने कहा कि भारत अब यह नहीं देखेगा कि आतंकी सीमा के उस पार हैं, इसलिए उन्हें जवाब नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा, “हमने यह तय किया कि आतंकियों को खुली छूट नहीं मिल सकती। यह सोच कि वे सीमा पार हैं इसलिए उन्हें छोड़ा जा सकता है – यह सोच अब बदलनी चाहिए। और हमने वैसा ही किया।”
जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत पर आतंकवादी हमले कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने दुनिया को याद दिलाया कि पाकिस्तान की तरफ से भारत पर हमले दशकों से हो रहे हैं – इसकी शुरुआत देश के विभाजन के साथ ही हो गई थी। उन्होंने संसद पर हमले और मुंबई के 26/11 जैसे आतंकी हमलों को इसका सबूत बताया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर उन्होंने यह संदेश भी दिया कि आतंकवाद के खिलाफ दुनिया को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। “दुनिया को यह समझना होगा कि आतंकवाद के लिए कोई बहाना नहीं हो सकता – न कोई परिस्थिति, न कोई तर्क। अगर कोई देश आतंकियों को पनाह देता है, समर्थन करता है, उन्हें पैसा देता है, तो उसे बेनकाब करना और जिम्मेदार ठहराना ज़रूरी है।”
एस. जयशंकर ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुई टकराव की पृष्ठभूमि से जुड़ी एक अहम बात का भी खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब भारत ने आतंकियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई थी, तब पाकिस्तान ने अमेरिका के जरिए भारत को चेतावनी दी थी। “मैं उस कमरे में मौजूद था जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 9 मई की रात बात की। उन्होंने कहा कि अगर भारत कार्रवाई करता है तो पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला कर सकता है। लेकिन प्रधानमंत्री ने उस धमकी को नजरअंदाज कर दिया।” उन्होंने आगे कहा, “उल्टा, प्रधानमंत्री ने यह साफ कर दिया कि भारत की तरफ से जवाब ज़रूर दिया जाएगा। उसी रात पाकिस्तान ने बड़ा हमला किया और हम तुरंत उसका जवाब देने के लिए तैयार थे।”
अगली सुबह अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने जयशंकर को फोन कर बताया कि पाकिस्तान अब बातचीत के लिए तैयार है। जयशंकर ने कहा, “मैं आपको बस इतना बता सकता हूं कि उस समय क्या हुआ, क्योंकि मैं खुद उसमें शामिल था। बाकी आप खुद समझ सकते हैं।”
मई में भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव की वजह पहलगाम में हुआ आतंकी हमला था। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की। इसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों के 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया। जयशंकर ने कहा, “ये वो आतंकी संगठन हैं जिनके पाकिस्तान के शहरों में बाकायदा हेडक्वार्टर हैं, जिन्हें सब जानते हैं। हमने उन्हीं इमारतों को निशाना बनाया और तबाह किया।”
भारत का यह स्पष्ट रुख अब दुनिया को यह दिखाता है कि आतंक के खिलाफ लड़ाई में वह किसी भी हद तक जा सकता है – चाहे वह सीमापार हो या कोई राजनीतिक दबाव हो। भारत अब हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक रवैया अपना चुका है।





