आचार्य प्रशांत ‘मोस्ट इंपैक्टफुल एनवायरनमेंटलिस्ट’ अवॉर्ड से सम्मानित

प्रसिद्ध दार्शनिक, वेदांत शिक्षक और लेखक आचार्य प्रशांत को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘मोस्ट इंपैक्टफुल एनवायरनमेंटलिस्ट’ अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें पर्यावरण चेतना को आध्यात्मिक स्पष्टता से जोड़ने और लाखों लोगों को सतत जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के लिए दिया गया।
यह पुरस्कार ‘ग्रीन सोसाइटी ऑफ इंडिया’ द्वारा आयोजित विश्व पर्यावरण सम्मेलन 2025 के दौरान ग्रेटर नोएडा में प्रदान किया गया। इस मौके पर अपने प्रेरणादायी संबोधन में आचार्य प्रशांत ने कहा, “जलवायु संकट केवल बाहर नहीं है, भीतर भी है। हिमालय की बर्फ इसलिए पिघल रही है क्योंकि हमारे मन लोभ से जल रहे हैं। समुद्र का स्तर इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि हमारी इच्छाओं की कोई सीमा नहीं। जब तक सोच में स्पष्टता नहीं आती, तब तक जिम्मेदारी से आचरण नहीं हो सकता। असली पर्यावरणवाद नीतियों से नहीं, चेतना से शुरू होता है।”
#WATCH | Greater Noida, UP | Philosopher and Author Acharya Prashant says, “…As long as the principle of success remains the same as it is now, we will not be able to save the environment. All our success comes at the cost of the environment…Unless the human heart is… https://t.co/izPmUkrhFl pic.twitter.com/XsPhRzsWgS
— ANI (@ANI) June 5, 2025
आचार्य प्रशांत ने इस मौके पर ‘ऑपरेशन 2030’ नामक एक राष्ट्रव्यापी पहल की भी घोषणा की। यह पहल विशेष रूप से भारत के युवाओं को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। यह पहल संयुक्त राष्ट्र और IPCC द्वारा निर्धारित लक्ष्य — वर्ष 2030 तक वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने — से प्रेरित है।
उन्होंने कहा, “हमारे पास समय नहीं बचा है, समय पहले ही निकल चुका है। 2030 अब सिर्फ एक नीति लक्ष्य नहीं, बल्कि पृथ्वी की जीवनरेखा है। अब केवल एक आंतरिक क्रांति ही हमारी उम्मीद बन सकती है, जो जागरूक और साहसी व्यक्तियों के नेतृत्व में हो, जो इस संकट का हिस्सा बनने से इनकार करें। इस ग्रह को बचाने कोई और नहीं आएगा — इसकी शुरुआत आपसे होती है।”
आचार्य प्रशांत, जिन्होंने अब तक 160 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं और ‘प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन’ की स्थापना की है, लगातार आत्मिक जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ने वाले अभियानों का नेतृत्व करते रहे हैं। उनकी यह सोच और पहल न केवल आध्यात्मिकता को पर्यावरण से जोड़ती है, बल्कि आने वाले समय में भारत के युवा नेतृत्व को एक नई दिशा देने का कार्य भी कर रही है।





