मेरिटल रेप को लेकर केंद्र सरकार ने SC में दायर किया जवाब, कहा- ‘यह कानूनी से ज्यादा सामाजिक है’
मेरिटल रेप को लेकर केंद्र सरकार ने SC में दायर किया जवाब, कहा- ‘यह कानूनी से ज्यादा सामाजिक है’
मैरिटल रेप को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। केंद्र सरकार ने मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाने को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने मैरिटल रेप को अपराध घोषित करने की मांग करने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए कहा कि मैरिटल रेप को अपराध बनाने की जरूरत नहीं है, यह यह कानूनी से ज्यादा सामाजिक मुद्दा है।
केंद्र सरकार ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा कानूनी से अधिक सामाजिक है। इसका समाज पर सीधा असर पड़ता है। इसके साथ ही केंद्र ने यह तर्क भी दिया कि अगर ‘वैवाहिक बलात्कार’ को भी अपराध घोषित किया जाता है, तो ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
केंद्र सरकार ने बताया कि 2013 में जब भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 में संशोधन किया गया, तो उस समय संसद ने वैवाहिक दुष्कर्म के लिए अपवाद-2 (एक विशेष नियम) को बनाए रखने का फैसला लिया। अगर कोर्ट इसे अपवाद मानकर रद्द करती है, तो इसका शादी के रिश्ते पर गहरा असर पड़ेगा। अपवाद 2 के तहत अगर पति सहमति के बिना अपनी पत्नी के साथ शारीरिक संबंध बनाता है तो उसे दंडित नहीं किया जाएगा।
सरकार ने इसको लेकर भी आगाह किया कि इससे शादीशुदा जीवन पर गंभीर असर पड़ सकता है और यह रिश्ते को अस्थिर कर सकता है। इसने कहा, तेजी से बदले सामाजिक और पारिवारिक ढांचे में संशोधित प्रावधानों का दुरुपयोग भी संभव है, क्योंकि किसी व्यक्ति के लिए यह साबित करना मुश्किल होगा कि सहमति थी या नहीं।





