क्या है एग्जिट पोल? यहां पढ़ें

सात चरणों वाला लोकसभा चुनाव रविवार को संपन्न हो गया. सातवें चरण में, सात राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 10.17 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने 918 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला सील कर दिया है.
मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद ही एग्जिट पोल आ जाएंगे. एग्जिट पोल को समझने के लिए यहां आपका पूरा गाइड है-
एग्जिट पोल क्या हैं?
एक चुनावी एग्जिट पोल मतदाताओं का एक तरह का मतदान है, जो मतदाताओं द्वारा अपने मतदान केंद्रों को छोड़ने के तुरंत बाद आयोजित किया जाता है। यह कई संगठनों द्वारा संचालित किया जाता है और इसे एक संकेतक माना जाता है कि कौन सी पार्टी सरकार बनाएगी.
एग्जिट पोल कैसे किए जाते हैं?
विभिन्न एजेंसियां भारत में कई तरीकों का उपयोग करके एग्जिट पोल करती हैं। एग्जिट पोल की भविष्यवाणी करने का मूल तरीका नमूनों को आंकना है. इसमें इस्तेमाल होने वाले कुछ मापदंडों में शामिल हैं उम्र, लिंग, जाति, क्षेत्र।
मतदान से पहले एग्जिट पोल का प्रसारण क्यों नहीं किया जाता है?
मतदान की शुरुआत से लेकर मतदान के अंतिम चरण के आधे घंटे बाद तक जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 126A, 1951 लागू रहती है, जिसके तहत एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इस धारा के प्रावधानों का पालन नहीं करने वाले किसी भी व्यक्ति को 2 साल तक के लिए कारावास की सजा दी जा सकती है या इस धारा के तहत जुर्माना, या दोनों ही सजा मिल सकती है.
एग्जिट पोल EC द्वारा प्रतिबंधित क्यों हैं?
2004 में चुनाव आयोग ने कानून मंत्रालय से संपर्क किया था, जो चुनाव आयोग द्वारा निर्दिष्ट अवधि के दौरान एक्जिट और ओपिनियन पोल दोनों पर प्रतिबंध लगाने के लिए जनप्रतिनिधित्व कानून में संशोधन की मांग कर रहा था.
एग्जिट पोल कितने विश्वसनीय हैं?
भारत में एग्जिट पोल पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसके पीछे कारण हैं। ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जब चुनाव के फैसले की गलत भविष्यवाणी की गई थी। उदाहरण के लिए, 2004 में, एग्जिट पोल ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन के फिर से जीतने की गलत भविष्यवाणी की। 2009 में फिर से कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए की सीटों में हिस्सेदारी को कम आंका गया था.
2019 के लोकसभा चुनाव सात चरणों में आयोजित किए गए, जो 11 अप्रैल से शुरू हुए थे. चुनाव के नतीजे 23 मई को घोषित किए जाएंगे.





