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सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए लोकसभा ने पास किया बिल

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लोकसभा ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए एक संशोधन विधेयक पारित किया।

इस विधेयक में शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 करने की मांग है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल नहीं किया गया है.

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2019 पारित किया गया.

प्रसाद ने कहा कि सरकार की भूमिका न्यायपालिका के काम में हस्तक्षेप नहीं करने की है, बल्कि सहयोग करने की है. उन्होंने कहा कि 2016 में उच्च न्यायालय में 126 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई, 2017 में 115 तथा 2018 में 108 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई और इस साल अब तक 31 न्यायाधीशों की नियुक्ति कर चुके हैं.

राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) विधेयक पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का उल्लेख करते हुए प्रसाद ने कहा कि फैसले में यह कहना उचित नहीं है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में भारत की संसद का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा.

प्रसाद ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) पर सर्वसम्मति होनी चाहिए, लेकिन इसमें राजनीति नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीशों और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों का फीडर कैडर 906 से बढ़कर 1,079 हो गया है और वर्तमान में नए उच्च न्यायालयों की स्थापना भी पिछले वर्षों में की गई है.

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इससे पहले विधेयक पेश करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि देश में अखिल भारतीय न्यायिक सेवा होनी चाहिए. आईएएस और आईपीएस की तर्ज पर इसकी परीक्षा होनी चाहिए. इससे सभी वंचित तबकों को न्यायपालिका में जगह मिलेगी. प्रसाद ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार में न्यायपालिका में रिक्तियों को भरने के पूरे प्रयास किए गए हैं. उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की संख्या 906 से बढ़कर 1079 हो गई है.

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से कहा था कि न्यायाधीशों की अपर्याप्त संख्या शीर्ष अदालत में मामलों के बैकलॉग के प्रमुख कारणों में से एक है। 1 जून को, शीर्ष अदालत में 58,669 मामले लंबित थे.

शीर्ष न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) समेत 31 न्यायाधीश हैं. उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) कानून, 1956 आखिरी बार 2009 में संशोधित किया गया था, जब सीजेआई के अलावा न्यायाधीशों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 की गई थी. भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शीर्ष न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने का आग्रह किया था.