बिहार में जातिगत सर्वे के आंकड़े जारी, कुल आबादी 13 करोड़ से भी ज्यादा

पटना: बिहार सरकार ने जातिगत गणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं. बिहार के मुख्य सचिव ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार जाति आधारित गणना 2022 की पुस्तिका का विमोचन किया. इस पुस्तक के माध्यम से बिहार की जातिगत गणना के आंकड़े सार्वजनिक कर दिये गए हैं. बिहार जाति आधारित सर्वे में कुल आबादी 13 करोड़ से ज्यादा बताई गई है.
बिहार में राजपूत की आबादी 3.45%, यादव 14%, भूमिहार 2.86%, ब्राह्मण 3.65% और नौनिया 1.9 फीसदी हैं. जातिगत सर्वे के आंकड़ों के अनुसार बिहार में पिछड़ा वर्ग के 27.13 प्रतिशत, अति पिछड़ा वर्ग 36.01 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा 15.52 प्रतिशत के लोग हैं. वहीं बिहार की कुल आबादी 13,07,25,310 है, जिसमें पिछड़ा वर्ग 3,54,63,936, अत्यंत पिछड़ा वर्ग 4,70,80,514, अनुसूचित जाति 2,56,89,820, अनुसूचित जनजाति 21,99,361, अनारक्षित 2,02,91,679 हैं. बिहार सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बिहार में 82% हिन्दू, 17. 7% मुसलमान, .05% ईसाई, .08% बौद्ध धर्म, .0016% कोई धर्म नहीं है.
वहीं जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी होने पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर लिखा,
आज गांधी जयंती के शुभ अवसर पर बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना के आंकड़े प्रकाशित कर दिए गए हैं. जाति आधारित गणना के कार्य में लगी हुई पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई!
जाति आधारित गणना के लिए सर्वसम्मति से विधानमंडल में प्रस्ताव पारित किया गया था. बिहार विधानसभा के सभी 9 दलों की सहमति से निर्णय लिया गया था कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराएगी एवं दिनांक 02-06-2022 को मंत्रिपरिषद से इसकी स्वीकृति दी गई थी. इसके आधार पर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से जाति आधारित गणना कराई है. जाति आधारित गणना से न सिर्फ जातियों के बारे में पता चला है बल्कि सभी की आर्थिक स्थिति की जानकारी भी मिली है. इसी के आधार पर सभी वर्गों के विकास एवं उत्थान के लिए अग्रेतर कार्रवाई की जाएगी.
बिहार में कराई गई जाति आधारित गणना को लेकर शीघ्र ही बिहार विधानसभा के उन्हीं 9 दलों की बैठक बुलाई जाएगी तथा जाति आधारित गणना के परिणामों से उन्हें अवगत कराया जाएगा.





