ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया है। इसके बाद तेहरान ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो उसका “करारा जवाब” दिया जाएगा।
करीब दो महीने से जारी संघर्ष के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन ट्रंप के ताजा बयान ने हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है।
ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा, “मैंने ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा। मुझे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया पूरी तरह अस्वीकार्य।”
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि वह अपने कुछ उच्च स्तर के समृद्ध यूरेनियम को कम करेगा और बाकी सामग्री किसी तीसरे देश को सौंप देगा। हालांकि, तेहरान ने शर्त रखी थी कि अगर समझौता टूटता है तो वह सामग्री वापस की जाए।
ट्रंप ने इस पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की, लेकिन दावा किया कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर करीबी नजर रख रहा है।
उन्होंने कहा, “अगर कोई उस जगह के पास भी जाएगा तो हमें पता चल जाएगा।”
ईरान का पलटवार
ईरान ने अमेरिकी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह किसी भी नए हमले का जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा। साथ ही तेहरान ने साफ किया कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में विदेशी युद्धपोतों की मौजूदगी भी बर्दाश्त नहीं करेगा।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को “सरेंडर” जैसा बताया और युद्ध हर्जाना, प्रतिबंध हटाने तथा जब्त संपत्तियों की वापसी जैसी मांगें रखीं।
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा, “हम कभी दुश्मन के सामने नहीं झुकेंगे। बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं होता।”
नेतन्याहू का भी बड़ा बयान
इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि संघर्ष तब तक खत्म नहीं होगा जब तक ईरान का समृद्ध यूरेनियम पूरी तरह हटाया नहीं जाता और उसके परमाणु ठिकानों को बंद नहीं किया जाता।
उन्होंने कहा, “यह युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है।”
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ा मुद्दा
युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सख्त नियंत्रण बढ़ा दिया है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। इसके कारण वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी असर पड़ा है।
ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई देश अब इस क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि ईरान ने विदेशी सैन्य हस्तक्षेप पर “तुरंत जवाब” देने की चेतावनी दी है।





