FDA ने मोटापे के लिए पहली GLP-1 टैबलेट को दी मंज़ूरी, Novo Nordisk की बड़ी कामयाबी

अमेरिका की फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने मोटापे के इलाज के लिए पहली बार GLP-1 आधारित टैबलेट को मंज़ूरी दे दी है। यह टैबलेट मशहूर वेट-लॉस दवा Wegovy बनाने वाली कंपनी Novo Nordisk ने तैयार की है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस फैसले से अब ज़्यादा लोगों तक इलाज पहुंच पाएगा, खासकर उन मरीजों तक जो इंजेक्शन से डरते हैं।
Novo Nordisk ने बताया कि यह टैबलेट 2026 की शुरुआत में बाजार में उतारी जाएगी। जनवरी 2026 से इसकी शुरुआती खुराक (1.5 मिलीग्राम) फार्मेसी और कुछ चुनिंदा टेलीहेल्थ प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होगी। सेविंग ऑफर्स के साथ इसकी कीमत लगभग 149 डॉलर प्रति महीना रखी गई है।
कंपनी ने यह भी बताया कि यही शुरुआती कीमत उन मरीजों के लिए भी होगी जो सीधे भुगतान करते हैं और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर वेबसाइट TrumpRx के जरिए दवा लेते हैं। यह वेबसाइट भी जनवरी में शुरू होगी। हालांकि, दवा की ज्यादा खुराक की कीमतों को लेकर कंपनी ने अभी जानकारी नहीं दी है। FDA की मंज़ूरी के बाद Novo Nordisk के शेयरों में सोमवार को एक्सटेंडेड ट्रेडिंग में करीब 10% की तेजी देखी गई।
दिल की बीमारियों के खतरे में भी कमी
FDA ने इस टैबलेट को सिर्फ वजन घटाने के लिए ही नहीं, बल्कि मोटापे और पहले से हृदय रोग से जूझ रहे वयस्कों में दिल का दौरा, स्ट्रोक और मौत जैसे बड़े कार्डियोवैस्कुलर जोखिम को कम करने के लिए भी मंज़ूरी दी है।
यह टैबलेट Wegovy की तरह ही semaglutide नामक एक्टिव इंग्रीडिएंट पर आधारित है, जो भूख को कंट्रोल करने वाले GLP-1 हार्मोन की नकल करता है।
Novo Nordisk के अमेरिका ऑपरेशंस के एग्ज़ीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट डेव मूर ने कहा कि “ओरल यानी टैबलेट विकल्प आने से ऐसे लोग भी इलाज के लिए आगे आएंगे जो अब तक इंजेक्शन से बचते थे। इससे मरीजों और डॉक्टरों के बीच इलाज को लेकर बातचीत आसान होगी।”
किन लोगों को होगा ज़्यादा फायदा
हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, टैबलेट उन मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है जो सुई से डरते हैं या जिनका मोटापा बहुत गंभीर नहीं है, लेकिन फिर भी उन्हें इलाज की ज़रूरत है।
अमेरिका में नवंबर तक करीब हर 8 में से 1 वयस्क ने वजन घटाने या किसी और बीमारी के लिए GLP-1 दवाएं लेने की बात कही थी।
बाजार में बढ़ेगी मुकाबले की रफ्तार
इस मंज़ूरी से Novo Nordisk को अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी Eli Lilly पर बढ़त मिल गई है, जो अपनी मोटापे की टैबलेट लाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि 2030 तक वेट-लॉस दवाओं का वैश्विक बाजार करीब 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिसमें टैबलेट्स की बड़ी हिस्सेदारी होगी। एनालिस्ट्स का कहना है कि टैबलेट की सुविधा और आराम के चलते Novo Nordisk को शुरुआती दौर में फायदा मिल सकता है, हालांकि आने वाले समय में मुकाबला और तेज़ होगा।
ट्रायल में मिले अच्छे नतीजे
यह मंज़ूरी एक फेज-3 ट्रायल के आधार पर दी गई है, जिसमें 300 से ज्यादा मोटापे से ग्रस्त वयस्कों को शामिल किया गया था।
ट्रायल में 25 मिलीग्राम की खुराक लेने वाले मरीजों का औसतन 64 हफ्तों में 16.6% तक वजन कम हुआ। हालांकि, इस टैबलेट को लेने वालों को रोज़ दवा खाने के बाद 30 मिनट तक कुछ भी खाने-पीने से बचना होगा। कंपनी का कहना है कि यह नियम मरीजों के लिए दवा लेने की आदत बनाने में मदद करता है।
अवैध कॉपी दवाओं पर भी चिंता
Novo Nordisk ने सस्ती, अवैध रूप से बनाई जा रही GLP-1 दवाओं पर भी चिंता जताई है। कंपनी का कहना है कि नई टैबलेट की कीमत उन मरीजों को भी राहत देगी जो अब तक अनधिकृत कॉपी दवाओं की ओर जा रहे थे। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि अमेरिका में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उसका मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम तैयार है और नॉर्थ कैरोलाइना में उत्पादन शुरू हो चुका है।
कुल मिलाकर, FDA की यह मंज़ूरी मोटापे के इलाज में एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, जिससे इलाज ज़्यादा आसान, सुलभ और स्वीकार्य हो सकता है।





