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“बच्चे मेरे पास सुरक्षित हैं” — पवई की दादी मंगला पाटणकर ने बचाई 17 बच्चों की जान

मुंबई के पवई इलाके में गुरुवार को हुए 17 बच्चों के बंधक कांड के दौरान एक बुजुर्ग महिला ने अद्भुत हिम्मत दिखाई। 70 साल की मंगला पाटणकर नाम की यह महिला अपनी नातिन को ऑडिशन के लिए पवई के आर.ए. स्टूडियो लेकर गई थीं। लेकिन वही ऑडिशन बाद में एक होस्टेज ड्रामा में बदल गया, जिसमें बच्चों को 50 साल के रोहित आर्या ने बंधक बना लिया।

पुलिस और फायर ब्रिगेड जब बाहर से बचाव कार्य में जुटी थी, तब मंगला पाटणकर स्टूडियो के अंदर ही फंसी रहीं और उन्होंने बच्चों की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभाई। घटना के दौरान उन्हें कांच के टुकड़ों से सिर में चोट भी लगी और फिलहाल उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

मंगला पाटणकर ने बताया – “वो बच्चों को ऊपर ले गया और बोला, तुम भी आओ”

अस्पताल के बिस्तर से पाटणकर ने बताया कि रोहित आर्या पहले कुछ बच्चों को ऊपर ले गया और बाकी बच्चों को उनके साथ छोड़ गया। थोड़ी देर बाद वह वापस नीचे आया और बोला, “ऊपर चलो, सब बच्चों को साथ ले आओ।” जब पाटणकर ऊपर पहुंचीं तो देखा कि वहां सब खिड़कियों पर काले परदे लगे हुए थे। उन्होंने बताया, “ऐसा लग रहा था कि उसने यह सब पहले से प्लान किया हुआ था।”

आर्या ने चार बच्चों से उनके माता-पिता को फोन करवाया और प्रत्येक से 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। वह बार-बार कह रहा था कि उसे अभी 4 करोड़ रुपये चाहिए, नहीं तो उसने धमकी दी कि बिल्डिंग में बम लगाया है।

“वो मिठास दिखा रहा था, लेकिन बहुत नाटक कर रहा था”

मंगला पाटणकर ने बताया कि रोहित आर्या बच्चों के सामने कभी मीठा व्यवहार करता, तो कभी ड्रामा करने लगता। “उसने दिवाली के पटाखे जलाए और कहा कि बाहर फायरिंग हो रही है, ताकि कोई बाहर न निकले।” उन्होंने बताया कि बाहर जब लोगों ने फोन करके पूछा कि क्या बच्चे सुरक्षित हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, “बच्चे मेरे पास सुरक्षित बैठे हैं, चिंता मत करो।” उन्हें शक था कि संस्थान की एक महिला कर्मचारी भी इस योजना में शामिल थी, क्योंकि वह बाकी सबकी तरह डरी हुई नहीं लग रही थी।

बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद ली

मंगला पाटणकर ने बताया कि उन्होंने बच्चों, खासकर लड़कियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा। वह लगातार बाहर इंतजार कर रहे माता-पिता को बच्चों की तस्वीरें भेजती रहीं, ताकि उन्हें पता चल सके कि बच्चे सुरक्षित हैं। रोहित आर्या ने कथित रूप से एक वेब सीरीज़ ऑडिशन के बहाने बच्चों को बुलाया था। बाद में उसने एक वीडियो जारी किया और कहा कि महाराष्ट्र शिक्षा विभाग ने उसका 2 करोड़ रुपये बकाया नहीं दिया है, इसलिए वह यह सब कर रहा है।

करीब साढ़े तीन घंटे तक चला यह ड्रामा तब खत्म हुआ जब मुंबई पुलिस ने डक्ट पाइप चढ़कर बच्चों को बचाया।
एक बहादुर पुलिसकर्मी बाथरूम की खिड़की से अंदर घुसा और जब आर्या ने एक बच्चे को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो उसे गोली मार दी गई।

पवई की यह घटना मुंबई को झकझोर देने वाली थी, लेकिन मंगला पाटणकर जैसी दादी ने यह साबित कर दिया कि साहस उम्र का मोहताज नहीं होता। उनकी सूझबूझ और हिम्मत से 17 मासूम बच्चों की जान बची — और मुंबई ने एक नई हीरो दादी को देख लिया।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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