शहद जैसी आवाज़ और सादगी का संगम: जानिए कौन है सुरों की रानी श्रेया घोषाल ?

भारतीय संगीत जगत में जब भी मधुरता और सुरीलेपन की बात होती है, तो एक नाम सबसे पहले ज़हन में आता है श्रेया घोषाल। 12 मार्च को इस जादुई आवाज़ की स्वामिनी अपना जन्मदिन मना रही हैं। पिछले दो दशकों से श्रेया अपनी आवाज़ से न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज कर रही हैं।
एक छोटी सी शुरुआत और बड़ा सपना
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जन्मी श्रेया ने महज 4 साल की उम्र से संगीत सीखना शुरू कर दिया था। उनकी प्रतिभा को पहली बार दुनिया ने तब पहचाना जब उन्होंने रियलिटी शो ‘सा रे गा मा पा’ का खिताब जीता। इसी शो के दौरान फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की मां की नज़र उन पर पड़ी और यहीं से उनके बॉलीवुड सफर की नींव रखी गई।
‘देवदास’ और रातों-रात शोहरत
सिर्फ 16 साल की उम्र में श्रेया ने फिल्म ‘देवदास’ के लिए अपना पहला गाना रिकॉर्ड किया। ‘बैरी पिया’ गाने में उनकी आवाज़ की मासूमियत और गहराई ने सबको हैरान कर दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें अपना पहला नेशनल अवॉर्ड मिला। इसके बाद श्रेया ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
भाषा की सीमाओं से परे
श्रेया घोषाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि बंगाली, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और मराठी सहित 20 से अधिक भाषाओं में गाती हैं। उनकी उच्चारण की शुद्धता (Phonetics) इतनी सटीक होती है कि सुनने वाले को लगता ही नहीं कि वह भाषा उनकी मातृभाषा नहीं है।
उपलब्धियां और खास बातें
वह 5 बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड और कई बार फिल्मफेयर अवॉर्ड जीत चुकी हैं। अमेरिका के ओहियो राज्य में 26 जून को ‘श्रेया घोषाल डे’ के रूप में मनाया जाता है। मैडम तुसाद म्यूजियम में मोम की प्रतिमा पाने वाली वह पहली भारतीय गायिका हैं।
आज के दौर में जहाँ संगीत में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ गया है, श्रेया की आवाज़ में आज भी वही ‘शास्त्रीय शुद्धता’ और ‘रूहानियत’ बनी हुई है। उनके जन्मदिन पर हम बस यही कह सकते हैं कि उनकी आवाज़ आने वाले कई दशकों तक हमें इसी तरह मंत्रमुग्ध करती रहे।





