शारदीय नवरात्रि आरंभ: मां शैलपुत्री की पूजा और कलश स्थापना से हुई पावन नौ दिनों की शुरुआत

देशभर में आज से श्रद्धा और उत्साह के नौ दिनों का पर्व शारदीय नवरात्रि शुरू हो गया है। इस पावन उत्सव के पहले दिन को मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित किया जाता है। मां शैलपुत्री को पर्वतों की पुत्री कहा जाता है और इन्हें नवदुर्गा के पहले स्वरूप के रूप में पूजा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शैलपुत्री को प्रकृति, समृद्धि और विकास की देवी माना जाता है। भक्त उनके आशीर्वाद से शांति, संतुलन और आध्यात्मिक जागरण की कामना करते हैं। मां शैलपुत्री को चंद्रमा से भी जोड़ा गया है, जिन्हें सौभाग्य और शांति की दात्री माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार मां शैलपुत्री, देवी सती का ही पुनर्जन्म हैं। वह हिमालय के राजा हिमावत की पुत्री बनीं और इस कारण उन्हें ‘शैलपुत्री’ यानी पर्वत की पुत्री कहा जाता है। इन्हें सती भवानी, पार्वती और हिमावती नामों से भी जाना जाता है। नवरात्रि के हर दिन एक विशेष रंग का महत्व होता है। पहले दिन का रंग सफेद होता है, जो पवित्रता, शांति और मासूमियत का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन सफेद रंग के कपड़े पहनकर मां शैलपुत्री का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना या कलश स्थापना का विशेष महत्व है। इस दिन घर के शुभ स्थान पर एक मिट्टी के पात्र में सात या नौ प्रकार के अनाज बोकर कलश स्थापित किया जाता है। कलश में गंगाजल, सुपारी, दूर्वा घास, अक्षत और सिक्के रखे जाते हैं। इसके ऊपर पांच आम के पत्ते और नारियल रखकर सजाया जाता है। पूजा स्थल को फूल, दीपक, धूप और प्रसाद से सजाया जाता है।
भक्त मां शैलपुत्री को शुद्ध देसी घी का भोग लगाते हैं और नौ दिनों तक जलता हुआ दीपक रखकर मां की आराधना करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।





