असम ही नहीं, पूरे देश से घुसपैठियों को बाहर निकालना भाजपा का लक्ष्य: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का संकल्प है कि कांग्रेस द्वारा बढ़ावा दिए गए घुसपैठियों को असम से ही नहीं, बल्कि पूरे देश से बाहर किया जाएगा। यह बयान उन्होंने असम के नगांव जिले में एक कार्यक्रम के दौरान दिया।
अमित शाह 15वीं-16वीं सदी के वैष्णव संत-सुधारक श्रीमंत शंकरदेव की जन्मस्थली बटद्रवा थान के ₹227 करोड़ की लागत से पुनर्विकसित परिसर के उद्घाटन के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इसी पवित्र भूमि से वह भाजपा का लक्ष्य घोषित करना चाहते हैं कि हर एक घुसपैठिए को देश से बाहर किया जाएगा, न कि केवल असम से।
असम और पूर्वोत्तर राज्यों में “घुसपैठिया” शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर अवैध प्रवासियों या बांग्लादेशी नागरिकों के लिए किया जाता है। गृह मंत्री ने असम की जनता से अपील की कि वे भाजपा को पांच और साल का समय दें, ताकि इस लक्ष्य को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि घुसपैठिए न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि असम की संस्कृति और पहचान पर भी असर डालते हैं। असम विधानसभा के चुनाव अगले छह महीनों में होने हैं।
अमित शाह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अगुवाई वाली असम सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में अब तक 1.29 लाख बीघा जमीन को घुसपैठियों से मुक्त कराया गया है। इसमें बटद्रवा थान और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास की जमीन भी शामिल है।
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने घुसपैठियों को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया, जिससे उन्हें जमीन कब्जाने का हौसला मिला। अमित शाह ने कहा कि इससे असम की संस्कृति और साहित्य को नुकसान पहुंचा। उन्होंने 1983 में लागू किए गए अब रद्द हो चुके आईएमडीटी कानून का भी जिक्र किया और इसे कांग्रेस की गलत नीतियों का उदाहरण बताया।
गृह मंत्री ने कहा कि 2016 के बाद से असम में भाजपा शासन के दौरान स्वर्णिम दौर आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्राओं की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल से करते हुए कहा कि मोदी जी ने पिछले 11 वर्षों में 36 बार असम का दौरा किया, जबकि मनमोहन सिंह ने अपने 10 साल के कार्यकाल में सिर्फ सात बार राज्य का दौरा किया था।
अमित शाह ने यह भी कहा कि पहले असम को समस्याओं वाला राज्य माना जाता था, लेकिन अब उद्योगपति इसे देश के विकास में योगदान देने वाला राज्य बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी असम में आंदोलन, हिंसा और उग्रवाद आम बात थी, लेकिन मोदी सरकार के दौरान पांच शांति समझौते हुए हैं, जिनमें से 92 प्रतिशत प्रावधान लागू हो चुके हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर भाजपा फिर सत्ता में आती है तो सभी प्रावधानों को पूरी तरह लागू किया जाएगा।





