मन की बात: पीएम मोदी ने अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की वापसी पर जताया गर्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 124वें एपिसोड में देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी, लोकल उद्योगों की मजबूती और पर्यावरण की रक्षा में हो रहे जमीनी प्रयासों की जमकर सराहना की। पीएम मोदी ने कार्यक्रम की शुरुआत अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की सुरक्षित वापसी की बधाई के साथ की। उन्होंने कहा, “जैसे ही शुभांशु शुक्ला धरती पर सुरक्षित लौटे, पूरा देश खुशी से झूम उठा। यह पल हर भारतीय के लिए गर्व का था।”
प्रधानमंत्री ने बताया कि अब देश में बच्चों और युवाओं में अंतरिक्ष को लेकर नई उत्सुकता देखी जा रही है, जो विज्ञान और इनोवेशन के क्षेत्र में भारत को आगे ले जा रही है। उन्होंने बताया कि पांच साल पहले तक देश में 50 से भी कम स्पेस स्टार्टअप थे, लेकिन अब इनकी संख्या 200 से ज्यादा हो गई है। पीएम मोदी ने ‘विकसित भारत’ के सपने की बात करते हुए आत्मनिर्भरता को उसकी नींव बताया। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को इसमें अहम भूमिका निभाने वाला बताया। मोदी ने 23 अगस्त को मनाए जाने वाले ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ का जिक्र करते हुए लोगों से इसके आयोजन को लेकर अपने सुझाव भेजने की अपील भी की।
कार्यक्रम में पीएम मोदी ने भारत की समृद्ध हैंडलूम परंपरा की भी चर्चा की। उन्होंने याद दिलाया कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी, इसीलिए हर साल इस दिन को ‘राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। मोदी ने महाराष्ट्र की कविता धावले, ओडिशा की आदिवासी महिलाओं और बिहार के नवीन कुमार जैसे लोगों की सराहना की जो पारंपरिक हथकरघा को नए दौर से जोड़ने का काम कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने ओडिशा के क्योंझर जिले की ‘राधा-कृष्ण संकीर्तन’ नामक एक धार्मिक समूह की तारीफ की, जो भक्ति संगीत के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जंगलों में लगने वाली आग से बचाव का संदेश गांव-गांव जाकर फैला रहा है। मोदी ने इंटरनेशनल ओलंपियाड्स में केमिस्ट्री और मैथ्स जैसे विषयों में भारतीय छात्रों की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उनकी सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने बताया कि मराठा विरासत से जुड़े 12 किलों को हाल ही में यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि ये किले भारत की वीरता और दूरदर्शिता के प्रतीक हैं और यह हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।





