दिल्ली होटल अग्निकांड: शारीरिक और मानसिक आघात से जूझ रहे हैं हादसे में बचे लोग

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक होटल में लगी भीषण आग के बाद, इस हादसे में जीवित बचे लोग अब गहरे शारीरिक और मानसिक आघात से जूझ रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल 21 मासूम लोगों की जान ले ली, बल्कि कई परिवारों को कभी न भूलने वाले जख्म भी दिए हैं। विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा रहे घायल उस खौफनाक सुबह को याद कर आज भी कांप उठते हैं, जब चारों तरफ धुएं का गुबार था और बचने का एकमात्र रास्ता खिड़कियों से कूदना ही बचा था।
“अब कभी किसी होटल में नहीं रुकूंगा”
अस्पताल के बिस्तर पर गंभीर रूप से घायल विशाल कुमार इस खौफनाक हादसे के प्रत्यक्षदर्शी और भुक्तभोगी हैं। विशाल ने अपनी जान बचाने के लिए होटल की पहली मंजिल से नीचे छलांग लगा दी थी, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। इस भयावह अनुभव को याद करते हुए एक घायल ने बेहद भावुक होकर कहा:
”मैं अब कभी किसी होटल में दोबारा नहीं रुकूंगा।”
एक बेटे का सपना और मुश्किल में पड़ा पिता का इलाज
इस हादसे की मार झेल रहे मैक्स अस्पताल में भर्ती 20 वर्षीय बांग्लादेशी नागरिक हबीब की कहानी और भी दर्दनाक है। हबीब और उनका परिवार वास्तव में भारत में अपने पिता के लिवर ट्रांसप्लांट (Liver Transplant) के इलाज के लिए आए थे। हबीब अपने बीमार पिता को अपने लिवर का एक हिस्सा दान करने वाले थे, और उनके पिता भी इसी अस्पताल में भर्ती हैं।
लेकिन इस भीषण अग्निकांड ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। डॉक्टरों के मुताबिक, आग से बचने के दौरान हबीब के लिवर के पास आई चोटों के कारण अब उनकी लिवर दान करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। अब यह परिवार न केवल शारीरिक पीड़ा झेल रहा है, बल्कि पिता की सर्जरी योजना को लेकर भी बेहद अनिश्चितता और गहरे मानसिक तनाव में है।





