Fraud and Scam

हरियाणा में करोड़ों के घोटाले का खुलासा, एसीबी ने चार आरोपियों को किया गिरफ्तार

हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार रात बड़ी कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर हरियाणा सरकार के पैसों से जुड़े संदिग्ध लेनदेन और जालसाजी का आरोप है। यह मामला दो निजी बैंकों — आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक — से जुड़ा हुआ है।

एसीबी के महानिदेशक अरशिंदर सिंह चावला ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के दो पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय शामिल हैं। इसके अलावा अभय की पत्नी स्वाति सिंगला और स्वाति के भाई अभिषेक सिंगला को भी गिरफ्तार किया गया है। पूरे मामले की जांच आईपीएस अधिकारी गंगा राम पुनिया की निगरानी में चल रही है।

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, स्वाति सिंगला और उनके भाई अभिषेक ने “स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स” नाम की एक कंपनी बनाई थी, जिसके जरिए सरकारी धन को दूसरी जगह ट्रांसफर किया गया। एजेंसी अब आरोपियों की पुलिस रिमांड मांगने की तैयारी कर रही है ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके।

यह मामला तब सामने आया जब विकास एवं पंचायत विभाग ने खातों में गड़बड़ी पाए जाने के बाद आंतरिक जांच कराई। विभाग द्वारा गठित जांच समिति के सामने 16 फरवरी 2026 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के वरिष्ठ अधिकारी पेश हुए थे। उन्हें लिखित जवाब और लेनदेन से जुड़े दस्तावेज जमा करने को कहा गया था, लेकिन अब तक बैंक की ओर से कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया गया।

जांच समिति को सौंपे गए रिकॉर्ड में सामने आया कि कई चेक और डेबिट नोट्स पर तत्कालीन महानिदेशक डीके बेहरा के कथित हस्ताक्षर थे, जबकि वह 28 अक्टूबर 2025 को ही पद छोड़ चुके थे। इसके अलावा डेबिट नोट्स पर कोई मेमो नंबर या डिस्पैच नंबर भी नहीं था, जिससे उनके फर्जी होने की आशंका और गहरी हो गई।

एक चेक में रकम अंकों में 2 करोड़ 50 लाख रुपये लिखी गई थी, जबकि शब्दों में केवल “पच्चीस रुपये” लिखा हुआ था। इसके बावजूद बैंक ने उस चेक को स्वीकार कर भुगतान कर दिया, जिसे जांच अधिकारी गंभीर लापरवाही मान रहे हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते से लगभग 46.56 करोड़ रुपये एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के खाते में ट्रांसफर किए गए। समिति ने एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से इन लेनदेन से जुड़े दस्तावेज मांगे थे, लेकिन अब तक पूरे रिकॉर्ड नहीं दिए गए हैं। रिपोर्ट में बैंक के रवैये को असहयोगात्मक बताया गया है।

खातों की जांच में यह भी सामने आया कि इन पैसों का लेनदेन हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम पंचकूला से भी हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि अन्य विभागों से जुड़े लेनदेन से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

एसीबी ने सोमवार रात पंचकूला थाने में आईडीएफसी और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कर्मचारियों, कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह केस मुख्य रूप से मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना 2.0 से जुड़े सरकारी खातों में कथित गड़बड़ी को लेकर दर्ज किया गया है। एसीबी ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा। एजेंसी करीब 590 करोड़ रुपये के अन्य संदिग्ध सरकारी लेनदेन की भी जांच करेगी।

एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक कदाचार से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की कई धाराएं, जिनमें धोखाधड़ी, विश्वासघात, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और आपराधिक साजिश शामिल हैं, भी जोड़ी गई हैं।

11 फरवरी को गठित आंतरिक जांच समिति की रिपोर्ट में फर्जी हस्ताक्षर, बिना अनुमति के धन का उपयोग और बैंकों की प्रक्रियागत लापरवाही जैसी गंभीर बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में दोनों बैंकों में खाते खोले गए थे और वित्त विभाग के निर्देश पर इनमें बड़ी रकम जमा की गई थी, लेकिन इन पैसों के उपयोग के लिए कभी सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली गई।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और एसीबी का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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न्यूज़ मोबाइल ब्यूरो

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