CM विजय ने ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानानंद को किया सम्मानित, नॉर्वे चेस 2026 जीतने पर ₹50 लाख का पुरस्कार

नॉर्वे चेस 2026 का ऐतिहासिक खिताब जीतने वाले भारतीय ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंद को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने राज्य की ओर से प्रज्ञानानंद को 50 लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की। यह सम्मान समारोह सोमवार को चेन्नई स्थित सचिवालय में आयोजित किया गया।
इस दौरान मुख्यमंत्री विजय ने युवा शतरंज स्टार के साथ शतरंज की एक दोस्ताना बाजी भी खेली। हाल ही में प्रज्ञानानंद नॉर्वे चेस टूर्नामेंट जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने हैं, जिसके बाद देशभर में उनकी उपलब्धि की सराहना हो रही है।
CM विजय ने खेली शतरंज की बाजी
मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, विजय ने ओस्लो में आयोजित नॉर्वे चेस 2026 जीतकर इतिहास रचने वाले प्रज्ञानानंद को सम्मानित किया और उनके साथ शतरंज भी खेला।
मीडिया से बातचीत में प्रज्ञानानंद ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि मुख्यमंत्री वास्तव में उनके साथ शतरंज खेलेंगे।
उन्होंने कहा,
“मुझसे शतरंज का बोर्ड लाने के लिए कहा गया था। हमने लगभग 15 मिनट तक खेला और मैं यह देखकर हैरान था कि मुख्यमंत्री खुद खेलना चाहते थे। उन्होंने मुझे काफी प्रोत्साहित किया और मेरा समर्थन किया।”
नॉर्वे चेस 2026 में रचा इतिहास
20 वर्षीय प्रज्ञानानंद ने शुक्रवार को जर्मनी के विन्सेंट कीमर को अंतिम राउंड में हराकर नॉर्वे चेस 2026 का खिताब अपने नाम किया। उन्होंने लगातार चार क्लासिकल मुकाबले जीतकर यह प्रतिष्ठित उपलब्धि हासिल की।
टूर्नामेंट में उन्होंने विश्व के कई दिग्गज खिलाड़ियों को चुनौती दी, जिनमें:
- मैग्नस कार्लसन
- डी. गुकेश
- अलीरेज़ा फिरोज़ा
- वेस्ली सो
- विन्सेंट कीमर
जैसे बड़े नाम शामिल थे।
कार्लसन और गुकेश पर भी दर्ज की जीत
प्रज्ञानानंद के अभियान की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने टूर्नामेंट के दौरान मैग्नस कार्लसन को दो बार हराया। इसके अलावा उन्होंने डी. गुकेश, अलीरेज़ा फिरोज़ा और विन्सेंट कीमर के खिलाफ भी महत्वपूर्ण जीत दर्ज की।
अमेरिका के वेस्ली सो दूसरे स्थान पर रहे, जबकि अंतिम राउंड में गुकेश को हराने के बावजूद मैग्नस कार्लसन चौथे स्थान पर रहे।
भारतीय शतरंज के लिए बड़ी उपलब्धि
प्रज्ञानानंद की यह जीत भारतीय शतरंज के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। विश्वनाथन आनंद के बाद भारत में शतरंज की नई पीढ़ी जिस तेजी से वैश्विक मंच पर सफलता हासिल कर रही है, उसमें प्रज्ञानानंद का यह खिताब एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।





